15 सितंबर तक एडवांस टैक्स की दूसरी किस्त: किसे, कितना भरना है

अगस्त खत्म होने को है और ITR की भागदौड़ के बीच एक और तारीख चुपचाप पास आ रही है — 15 सितंबर 2026। इस दिन तक टैक्स ईयर 2026-27 (1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027) के एडवांस टैक्स की दूसरी किस्त जमा करनी है। खास बात यह है कि 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू हो चुका है, इसलिए इस बार सेक्शन नंबर बदले हुए हैं, हालांकि नियम का ढांचा लगभग वही है।
अगर आपकी सैलरी के अलावा किराया, FD ब्याज, शेयर-म्यूचुअल फंड से कमाई, फ्रीलांसिंग या कोई छोटा कारोबार है, तो यह लेख आपके लिए है।
एडवांस टैक्स है क्या?
सरल भाषा में — साल खत्म होने का इंतज़ार किए बिना, जैसे-जैसे कमाई हो, वैसे-वैसे टैक्स किस्तों में जमा करना। सरकार इसे "pay as you earn" कहती है। नौकरीपेशा लोगों का TDS कंपनी हर महीने काटती है, इसलिए उन्हें आमतौर पर अलग से कुछ नहीं करना पड़ता। लेकिन जिनकी आय पर पूरा TDS नहीं कटता, उन्हें खुद किस्तें भरनी होती हैं।
किस पर लागू होता है — ₹10,000 का नियम
नए एक्ट के सेक्शन 404 के मुताबिक, अगर साल का अनुमानित टैक्स (TDS/TCS और उपलब्ध छूट घटाने के बाद) ₹10,000 या उससे ज़्यादा बनता है, तो एडवांस टैक्स भरना अनिवार्य है। यह सीमा पुराने कानून (सेक्शन 208) जैसी ही है।
आम तौर पर ये लोग इसके दायरे में आते हैं:
- फ्रीलांसर, कंसल्टेंट, गिग वर्कर — जिनकी आय पर 10% TDS कटता है लेकिन असली टैक्स स्लैब ज़्यादा है
- मकान-दुकान का किराया कमाने वाले
- FD/बॉन्ड का बड़ा ब्याज पाने वाले (बैंक सिर्फ 10% TDS काटता है)
- शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी से कैपिटल गेन कमाने वाले
- दुकानदार, छोटे कारोबारी, डॉक्टर, वकील, CA
- नौकरीपेशा जिनकी साइड-इनकम है और कंपनी को उसकी जानकारी नहीं दी
किसे छूट है?
सेक्शन 404 में ही साफ लिखा है — 60 साल या उससे ऊपर का रेज़िडेंट सीनियर सिटीज़न, जिसकी बिज़नेस या प्रोफेशन से कोई आय नहीं है, उसे एडवांस टैक्स भरने की ज़रूरत नहीं। यानी पेंशन, ब्याज, किराया या कैपिटल गेन पर टैक्स बनता भी हो, तो वह साल के अंत में सेल्फ-असेसमेंट टैक्स के तौर पर भर सकते हैं, बिना ब्याज के।
ध्यान दें: अगर सीनियर सिटीज़न कोई कंसल्टेंसी या दुकान चलाते हैं, तो छूट नहीं मिलेगी।

किस्तों का कैलेंडर (सेक्शन 408)
| तारीख | कुल जमा होना चाहिए (संचयी) |
|---|---|
| 15 जून 2026 | अनुमानित टैक्स का 15% |
| 15 सितंबर 2026 | 45% |
| 15 दिसंबर 2026 | 75% |
| 15 मार्च 2027 | 100% |
यहाँ सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग 15 सितंबर को "अलग से 45%" समझ लेते हैं। ऐसा नहीं है — 15 सितंबर तक कुल मिलाकर 45% जमा होना चाहिए। अगर जून में 15% दे चुके हैं, तो अब 30% और देना है। अगर जून में कुछ नहीं दिया, तो अब पूरा 45% देना होगा।
फ्रीलांसर और छोटे कारोबारियों के लिए खास नियम
जो लोग प्रिज़म्प्टिव टैक्सेशन (अनुमानित आय योजना) चुनते हैं — पुराने 44AD/44ADA, जो नए एक्ट में सेक्शन 58 के तहत आते हैं — उनके लिए सेक्शन 408(2) में सुविधा है: उन्हें चार किस्तें नहीं, बल्कि सिर्फ एक किस्त में 100% टैक्स 15 मार्च 2027 तक भरना होता है।
यानी अगर आप 44ADA वाले प्रोफेशनल हैं (डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, आर्किटेक्ट, अकाउंटेंट, टेक्निकल कंसल्टेंट, इंटीरियर डिज़ाइनर आदि) और आपकी सकल प्राप्तियाँ ₹50 लाख तक हैं (95% से ज़्यादा डिजिटल रसीद पर ₹75 लाख तक), तो 15 सितंबर की किस्त आप पर लागू नहीं है।
लेकिन सावधान — जो फ्रीलांसर प्रिज़म्प्टिव स्कीम नहीं चुनते और असली खर्च घटाकर आय दिखाते हैं, उन पर सामान्य चार-किस्त वाला नियम ही लागू है।
नौकरीपेशा के लिए खास: कब आप भी दायरे में आते हैं
बहुत से सैलरीड लोग मानते हैं कि एडवांस टैक्स उनका सिरदर्द नहीं है। यह सच है जब तक आपकी पूरी आय सैलरी है और कंपनी सही TDS काट रही है। लेकिन ये स्थितियाँ आपको दायरे में ला देती हैं:
- FD/बॉन्ड का ब्याज — बैंक 10% काटता है, 30% स्लैब वालों को बाकी 20% खुद देना है।
- दूसरा मकान किराये पर — किराये पर अक्सर TDS कटता ही नहीं।
- म्यूचुअल फंड रिडेम्प्शन या शेयर बिक्री — ब्रोकर टैक्स नहीं काटता।
- साल के बीच नौकरी बदली — नई कंपनी को पुरानी सैलरी न बताने पर दोनों जगह स्लैब छूट मिल जाती है और टैक्स कम कटता है।
- सैलरी के अलावा फ्रीलांस/कंसल्टिंग — 10% TDS से काम नहीं चलता।
ऐसे में अगर इन सब पर मिलाकर ₹10,000 से ज़्यादा टैक्स बचा है, तो 15 सितंबर आपकी तारीख भी है। आसान रास्ता: कंपनी के HR को अन्य आय की घोषणा दे दें, ताकि वही TDS बढ़ा दे और आपको अलग से चालान न भरना पड़े।
देर से देने पर क्या होगा — ब्याज का गणित
नए एक्ट में दो सेक्शन हैं, जो पुराने 234B और 234C की जगह आए हैं:
- सेक्शन 424 — अगर पूरे साल का भरा गया एडवांस टैक्स, अंतिम टैक्स के 90% से कम रहा, तो 1 अप्रैल से भुगतान तक 1% प्रति माह साधारण ब्याज।
- सेक्शन 425 — किसी किस्त में कमी या देरी पर, उस कमी पर 1% प्रति माह (हर तिमाही के हिसाब से) साधारण ब्याज।
एक छोटी राहत पुराने कानून की तरह बनी हुई है: अगर 15 जून तक कम से कम 12% और 15 सितंबर तक कम से कम 36% जमा हो गया, तो उन किस्तों पर 425 का ब्याज नहीं लगता। पर यह बफर है, टारगेट नहीं — टारगेट 15% और 45% ही है।
उदाहरण: मान लीजिए आपका अनुमानित टैक्स ₹1,00,000 है। 15 सितंबर तक ₹45,000 जमा होना चाहिए था, आपने ₹20,000 ही भरा। कमी ₹25,000 पर तीन महीने का 1% ब्याज यानी करीब ₹750। रकम छोटी लगती है, लेकिन हर किस्त की चूक जुड़ती जाती है और साल के अंत में 424 का अलग ब्याज भी लग सकता है।
पहला साल नए एक्ट का — "टैक्स ईयर" याद रखें
यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि पुराने एक्ट के तहत मार्च 2026 तक की आय (FY 2025-26) का ITR अभी भर रहे हैं, जबकि नया एक्ट अप्रैल 2026 से शुरू हुई आय पर लागू है। चालान भरते समय भी "असेसमेंट ईयर" की जगह अब टैक्स ईयर 2026-27 चुनना है — यह नई शब्दावली है, जिसमें फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर का फर्क खत्म कर दिया गया है।

अपना एडवांस टैक्स कैसे निकालें — 5 कदम
- साल भर की अनुमानित आय जोड़ें — सैलरी, किराया, ब्याज, कैपिटल गेन, फ्रीलांस/बिज़नेस आय।
- कटौतियाँ घटाएँ — अगर पुरानी व्यवस्था में हैं तो 80C-जैसी कटौतियाँ; नई व्यवस्था में सिर्फ स्टैंडर्ड डिडक्शन जैसी सीमित छूट।
- टैक्स निकालें — स्लैब के हिसाब से, सेस जोड़कर।
- TDS/TCS घटाएँ — जो पहले ही कट रहा है (Form 26AS/AIS में दिखेगा)।
- जो बचा, उसका 45% माइनस जून में भरी रकम = 15 सितंबर की किस्त।
अगर अनुमान सटीक नहीं बैठता, घबराएँ नहीं — दिसंबर और मार्च की किस्तों में एडजस्ट कर सकते हैं। कैपिटल गेन जैसी अचानक आय उसी तिमाही की किस्त में जोड़ी जाती है, जिसमें वह हुई; पिछली किस्तों पर ब्याज नहीं लगता।
ऑनलाइन भुगतान कैसे करें
- incometax.gov.in पर जाएँ → "e-Pay Tax"
- PAN और मोबाइल OTP से लॉगिन
- "Income Tax" चुनें → टैक्स ईयर 2026-27 → Advance Tax (100) चुनें
- रकम भरें, भुगतान का तरीका चुनें — नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, UPI, RTGS/NEFT, या क्रेडिट कार्ड
- चालान (CRN/BSR कोड) का PDF सेव करें — ITR भरते समय काम आएगा
कुछ दिन बाद यह रकम आपके Form 26AS और AIS में दिखने लगेगी।
क्या करें — चेकलिस्ट
- आज ही अप्रैल-अगस्त की आय का मोटा हिसाब लगाएँ, खासकर ब्याज और कैपिटल गेन।
- AIS/26AS खोलकर देखें कि कितना TDS पहले ही कट चुका है।
- अगर अनुमानित टैक्स ₹10,000 से ऊपर है और सीनियर सिटीज़न वाली छूट नहीं मिलती — तो 15 सितंबर से पहले किस्त भरें।
- फ्रीलांसर हैं तो तय करें कि सेक्शन 58 (प्रिज़म्प्टिव) चुन रहे हैं या नहीं — इसी पर निर्भर है कि एक किस्त देनी है या चार।
- नौकरीपेशा हैं और साइड-इनकम है, तो या तो कंपनी को Form 12BB में बताकर TDS बढ़वाएँ, या खुद एडवांस टैक्स दें।
- 15 सितंबर रविवार नहीं, मंगलवार है — आखिरी दिन पोर्टल पर भीड़ से बचने के लिए कुछ दिन पहले भुगतान कर लें।
एडवांस टैक्स कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं है — यह वही टैक्स है जो आपको वैसे भी देना है, बस समय पर देने से 1% महीने का ब्याज और मार्च में एकमुश्त बोझ बच जाता है।
(यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। अपनी स्थिति के लिए किसी योग्य टैक्स सलाहकार से सलाह लें।)
कवर फोटो: Ministry of Finance of India / GODL-India