विदेशी निवेशक बेच रहे, फिर भी बाजार क्यों नहीं गिर रहा? DII की ताकत समझिए

बाजार में एक अनोखी लड़ाई चल रही है
25 अगस्त 2026 को बीएसई सेंसेक्स 286.98 अंक यानी 0.37% चढ़कर 77,656.09 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी 115.50 अंक यानी 0.48% की बढ़त के साथ 24,334.55 पर पहुंच गया। दिलचस्प बात यह रही कि दिन की शुरुआत में बाजार दबाव में था, लेकिन हेल्थकेयर, फार्मा और पीएसयू बैंक शेयरों में खरीदारी आने से सूचकांकों ने नुकसान की भरपाई कर ली और हरे निशान में बंद हुए।
यह उतार-चढ़ाव अकेली घटना नहीं है। बीते कई महीनों से भारतीय शेयर बाजार में एक अनोखी "रस्साकशी" चल रही है — विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FII) लगातार शेयर बेच रहे हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) उतनी ही मजबूती से खरीदारी कर रहे हैं। आम निवेशक के लिए यह समझना जरूरी है कि आखिर हो क्या रहा है।
आंकड़े क्या कहते हैं
मार्केट डेटा ट्रैकर्स के मुताबिक 2026 में अब तक की स्थिति कुछ इस तरह रही है:
| पक्ष | 2026 में अब तक की गतिविधि |
|---|---|
| विदेशी निवेशक (FII) | करीब 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध बिकवाली |
| घरेलू निवेशक (DII) | करीब 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध खरीदारी |
हाल के कारोबारी सत्रों में भी यह रुझान साफ दिखा। 24 अगस्त 2026 को FII ने करीब 1,182 करोड़ रुपये और DII ने करीब 2,493 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। अगले दिन 25 अगस्त को FII ने भी करीब 1,594 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जबकि DII ने लगभग 230 करोड़ रुपये का निवेश किया। लेकिन इससे पहले 20 और 21 अगस्त को FII शुद्ध विक्रेता (नेट सेलर) रहे थे, जब उन्होंने क्रमशः करीब 583 करोड़ और 543 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे — जबकि DII ने उन दिनों भी खरीदारी जारी रखी।
यानी दिन-प्रतिदिन के आंकड़े ऊपर-नीचे होते रहते हैं, लेकिन साल भर के रुझान में विदेशी पैसा भारतीय बाजार से बाहर जा रहा है और घरेलू पैसा उसकी जगह भर रहा है।
FII कौन हैं और वे क्यों बेच रहे हैं
FII यानी Foreign Institutional Investors — ये विदेशी म्यूचुअल फंड, पेंशन फंड, हेज फंड और सॉवरेन वेल्थ फंड होते हैं जो भारत जैसे उभरते बाजारों (Emerging Markets) में पैसा लगाते हैं। ये निवेशक वैश्विक हालात के हिसाब से अपना पैसा एक देश से दूसरे देश ले जाते रहते हैं।
2026 में FII की बिकवाली के पीछे आमतौर पर ये कारण बताए जाते हैं:
- ऊंचा वैल्यूएशन — भारतीय शेयरों के भाव कमाई (अर्निंग्स) के मुकाबले महंगे माने जा रहे हैं, जिससे कुछ विदेशी फंड मुनाफा काटकर सस्ते बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं।
- डॉलर और वैश्विक ब्याज दरें — अमेरिका और अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता रहने पर वैश्विक निवेशक जोखिम भरे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर जाते हैं।
- दूसरे बाजारों में मौके — चीन, ताइवान जैसे कुछ अन्य एशियाई बाजारों में मूल्यांकन अपेक्षाकृत सस्ता होने पर वैश्विक फंड वहां पैसा शिफ्ट करते हैं।
DII इतनी मजबूती से क्यों खरीद रहे हैं
DII यानी Domestic Institutional Investors — इसमें भारतीय म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां (जैसे LIC), पेंशन फंड और बैंकों के ट्रेजरी शामिल हैं। इनकी खरीदारी की ताकत के पीछे मुख्य वजह है भारतीय घरों से हर महीने आने वाला लगातार निवेश।
महीने-दर-महीने SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए करोड़ों भारतीय निवेशक म्यूचुअल फंड में पैसा डालते रहते हैं। यह पैसा फंड मैनेजरों के पास आता है और वे इसे शेयर बाजार में लगाते हैं — चाहे बाजार का मूड कैसा भी हो। इसी वजह से DII की खरीदारी FII की बिकवाली के मुकाबले कहीं ज्यादा "स्थिर" (consistent) मानी जाती है।
बीमा कंपनियां और पेंशन फंड भी लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करते हैं, इसलिए वे अल्पकालिक उतार-चढ़ाव में जल्दी घबराकर नहीं बिकते।

आम निवेशक के लिए इसका क्या मतलब है
बाजार में गहराई बढ़ी है — पहले जब FII बड़े पैमाने पर बिकवाली करते थे, तो बाजार में तीखी गिरावट आ जाती थी। अब घरेलू निवेश की मजबूत "दीवार" होने से गिरावट की गहराई और अवधि दोनों सीमित हो रही हैं।
उतार-चढ़ाव अब भी सामान्य है — जैसा 25 अगस्त को देखा गया, दिन के भीतर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव आना आम बात है। किसी एक दिन की चाल को दीर्घकालिक ट्रेंड मान लेना गलत होगा।
सेक्टर आधारित हलचल पर ध्यान दें — हाल के सत्रों में हेल्थकेयर, फार्मा और पीएसयू बैंक जैसे सेक्टरों में खास खरीदारी देखी गई है, जो बताता है कि पैसा पूरे बाजार में समान रूप से नहीं बल्कि चुनिंदा सेक्टरों में जा रहा है।
FII-DII डेटा एक संकेतक है, सलाह नहीं — रोजाना के FII-DII आंकड़े बाजार की दिशा भांपने का एक उपकरण हैं, लेकिन अकेले इनके आधार पर खरीद-बिक्री का फैसला करना उचित नहीं। ये आंकड़े NSE और BSE की वेबसाइट पर हर कारोबारी दिन शाम को सार्वजनिक होते हैं और कोई भी निवेशक इन्हें मुफ्त में देख सकता है।
इतिहास से सबक — पहले क्या होता था
यह पहली बार नहीं है जब FII ने भारतीय बाजार से पैसा निकाला हो। 2008 की वैश्विक वित्तीय मंदी के दौरान और 2018-19 में भी विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर बिकवाली की थी। उस दौर में DII का आकार आज जितना बड़ा नहीं था, इसलिए FII की बिकवाली का सीधा और तीखा असर सूचकांकों पर दिखता था और बाजार में गहरी गिरावट आ जाती थी।
पिछले कुछ वर्षों में स्थिति बदली है। भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग का आकार कई गुना बढ़ चुका है, बीमा और पेंशन क्षेत्र में भी घरेलू बचत का प्रवाह मजबूत हुआ है। नतीजा यह है कि आज FII की बिकवाली को DII आसानी से सोख लेते हैं — कम से कम अभी तक के आंकड़े यही दिखाते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि भविष्य में भी हमेशा ऐसा ही होगा, क्योंकि अगर घरेलू प्रवाह में भी अचानक कमी आ जाए, तो बाजार पर दोहरा दबाव बन सकता है।
FII-DII डेटा कहां से मिलता है और कैसे पढ़ें
जो पाठक खुद ये आंकड़े ट्रैक करना चाहते हैं, वे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की आधिकारिक वेबसाइट पर रोजाना कारोबार बंद होने के बाद अपडेट होने वाला प्रोविजनल डेटा देख सकते हैं। इसके अलावा SEBI की वेबसाइट पर भी FPI (Foreign Portfolio Investors) से जुड़े मासिक आंकड़े प्रकाशित होते हैं।
डेटा पढ़ते समय ध्यान रखने वाली बातें:
- कैश सेगमेंट बनाम F&O सेगमेंट — FII का कैश बाजार में लेन-देन अलग होता है और फ्यूचर्स-ऑप्शंस (डेरिवेटिव) में अलग। दोनों को मिलाकर न देखें, नहीं तो तस्वीर उलझ सकती है।
- एक दिन का डेटा ट्रेंड नहीं है — किसी एक दिन FII के खरीदार बनने का मतलब यह नहीं कि बिकवाली का दौर खत्म हो गया। कम से कम दो-तीन हफ्तों के औसत रुझान को देखना बेहतर तरीका है।
- सेक्टर-वार डेटा भी देखें — कुल आंकड़े के साथ-साथ यह देखना भी उपयोगी है कि पैसा किन सेक्टरों में आ-जा रहा है, जैसा 25 अगस्त को हेल्थकेयर और पीएसयू बैंक में दिखा।
आगे क्या देखना चाहिए
अगले कुछ हफ्तों में तीन बातों पर नजर रखना अहम होगा:
- क्या FII की बिकवाली की रफ्तार धीमी पड़ती है या और तेज होती है, खासकर वैश्विक ब्याज दरों को लेकर आने वाले फैसलों के बाद।
- घरेलू म्यूचुअल फंड में मासिक SIP प्रवाह मजबूत बना रहता है या इसमें कोई कमी आती है।
- कंपनियों के तिमाही नतीजे और आगामी आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा को किस तरह प्रभावित करते हैं।
जब तक घरेलू निवेश का यह प्रवाह मजबूत बना रहेगा, तब तक भारतीय बाजार में विदेशी बिकवाली का असर सीमित रहने की संभावना बनी रहेगी। लेकिन बाजार हमेशा अनिश्चितताओं से भरा रहता है, इसलिए किसी भी रुझान को स्थायी मान लेना जोखिम भरा हो सकता है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से है, निवेश सलाह नहीं। कृपया कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सेबी-पंजीकृत निवेश सलाहकार से परामर्श करें।
कवर फोटो: Niyantha Shekhar / CC BY 2.0