सोना फिर रिकॉर्ड ऊंचाई पर: 24 अगस्त को ₹1.63 लाख के पार, वजह क्या है

सोना फिर रिकॉर्ड ऊंचाई पर: 24 अगस्त को ₹1.63 लाख के पार, वजह क्या है

24 अगस्त 2026, सोमवार की सुबह भारत में सोने के दाम फिर एक नई ऊंचाई की तरफ बढ़ते दिखे। 24 कैरेट सोना ₹16,397 प्रति ग्राम यानी ₹1,63,970 प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से करीब ₹880 ज़्यादा है। 22 कैरेट सोना ₹1,50,300 प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोना ₹1,22,930 प्रति 10 ग्राम पर था। चांदी भी पीछे नहीं रही — यह ₹260.10 प्रति ग्राम, यानी ₹2,60,100 प्रति किलो के करीब पहुंच गई।

दिल्ली और जयपुर में 24 कैरेट सोना ₹16,412 प्रति ग्राम पर बिका, जबकि मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, केरल, पुणे और भुवनेश्वर जैसे शहरों में यह ₹16,397 प्रति ग्राम रहा। अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और पटना में भाव ₹16,402 प्रति ग्राम दर्ज हुआ। यानी शहर-दर-शहर थोड़ा फर्क है, लेकिन दिशा एक ही है — ऊपर की ओर।

भारत में सोने के आभूषण और सिक्कों की दुकान
सोने की कीमतें भारत में शहर-दर-शहर थोड़ी अलग होती हैं (फोटो: Government of India / GODL-India)

आखिर सोना बार-बार रिकॉर्ड क्यों बना रहा है?

बाज़ार से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक़, सोने की यह तेज़ी "आर्थिक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की लगातार मांग" से जुड़ी है। इसे सीधी भाषा में समझें तो जब दुनिया में कहीं भी अस्थिरता बढ़ती है — चाहे वह किसी देश के बीच तनाव हो, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता हो या शेयर बाज़ारों में उतार-चढ़ाव — तो बड़े निवेशक और केंद्रीय बैंक अपने पैसे का एक हिस्सा सोने में लगाना पसंद करते हैं। इसे ही "सेफ हेवन डिमांड" यानी सुरक्षित निवेश की मांग कहा जाता है।

मोटे तौर पर इस समय तीन बातें सोने को सहारा दे रही हैं:

  • वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव — अलग-अलग क्षेत्रों में जारी अनिश्चितता की वजह से निवेशक जोखिम से बचना चाहते हैं।
  • ब्याज दरों को लेकर अटकलें — अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की दरों में कटौती की उम्मीदें बढ़ने पर सोना आमतौर पर आकर्षक बनता है, क्योंकि सोना रखने की "अवसर लागत" (opportunity cost) घट जाती है।
  • शेयर बाज़ारों में उतार-चढ़ाव — जब इक्विटी बाज़ार अस्थिर रहते हैं, तो कई निवेशक पोर्टफोलियो को संतुलित करने के लिए सोने-चांदी की तरफ रुख करते हैं।

सोना बनाम भारतीय शेयर बाज़ार — इसी हफ्ते की तस्वीर

यह तेज़ी ऐसे समय आई है जब भारतीय शेयर बाज़ार खुद रेंज-बाउंड यानी एक दायरे में सिमटा हुआ है। पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स लगभग सपाट बंद हुआ था और निफ्टी 50 में मामूली गिरावट देखी गई थी। सोमवार सुबह गिफ्ट निफ्टी के संकेत हल्की सकारात्मक शुरुआत की ओर इशारा कर रहे थे, लेकिन विश्लेषकों के मुताबिक़ 24,300 का स्तर निफ्टी के लिए तात्कालिक प्रतिरोध (resistance) बना हुआ है।

यानी जहां एक तरफ शेयर बाज़ार दिशा तलाश रहा है, वहीं सोना अपनी ऊंचाई की तरफ लगातार बढ़ रहा है। यह पैटर्न नया नहीं है — जब भी बाज़ार में अनिश्चितता बढ़ती है, सोना और इक्विटी अक्सर अलग-अलग दिशाओं में चलते नज़र आते हैं। इसी वजह से वित्तीय सलाहकार अक्सर पोर्टफोलियो में सोने को एक "डाइवर्सिफायर" यानी विविधता लाने वाले साधन के तौर पर देखने की बात करते हैं, न कि सिर्फ रिटर्न कमाने के ज़रिए।

शेयर बाज़ार का ट्रेडिंग स्क्रीन जिसमें उतार-चढ़ाव दिख रहा है
शेयर बाज़ार की अस्थिरता के बीच सोना सुरक्षित निवेश के तौर पर देखा जाता है (फोटो: Niyantha Shekhar / CC BY 2.0)

आम निवेशक के लिए सोने में निवेश के तरीके

भारत में सोने में पैसा लगाने के कई रास्ते उपलब्ध हैं, और हर एक का अपना स्वभाव है:

तरीका खासियत
फिजिकल गोल्ड (गहने, सिक्के) पारंपरिक, लेकिन मेकिंग चार्ज और शुद्धता की चिंता
डिजिटल गोल्ड छोटी रकम से शुरुआत, ऑनलाइन खरीद-बिक्री आसान
गोल्ड ईटीएफ स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार, डीमैट खाता ज़रूरी
गोल्ड म्यूचुअल फंड बिना डीमैट खाते के भी निवेश संभव
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (जब उपलब्ध हो) सरकार समर्थित, ब्याज भी मिलता है

हर विकल्प की लागत संरचना, लिक्विडिटी और टैक्स नियम अलग-अलग हैं, इसलिए किसी भी तरीके को चुनने से पहले उसकी शर्तों को ध्यान से समझना ज़रूरी है।

ध्यान रखने वाली बातें

सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाज़ार, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, आयात शुल्क और स्थानीय मांग जैसे कई कारकों से तय होती हैं। इसलिए दिन-प्रतिदिन के उतार-चढ़ाव को देखकर जल्दबाज़ी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचना समझदारी है। सोना ऐतिहासिक रूप से महंगाई से बचाव और पोर्टफोलियो को संतुलित करने के एक साधन के तौर पर देखा जाता रहा है, लेकिन किसी भी परिसंपत्ति की तरह इसमें भी कीमतों में गिरावट का जोखिम बना रहता है।

जो लोग सोने में निवेश की योजना बना रहे हैं, उन्हें अपने कुल पोर्टफोलियो में इसका अनुपात, निवेश की अवधि और अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही फैसला लेना चाहिए।

यह लेख केवल जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से है। यह निवेश सलाह नहीं है — निवेश से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले कृपया किसी SEBI-पंजीकृत निवेश सलाहकार से परामर्श करें।

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