हेल्थ इंश्योरेंस पर GST खत्म, फिर भी प्रीमियम क्यों बढ़ रहा है?

हेल्थ इंश्योरेंस पर GST खत्म, फिर भी प्रीमियम क्यों बढ़ रहा है?

अगर आपने हाल में अपनी हेल्थ पॉलिसी रिन्यू कराई है, तो आपके मन में एक सवाल जरूर आया होगा — सरकार ने तो इंश्योरेंस पर GST खत्म कर दिया था, फिर मेरा प्रीमियम कम होने की बजाय बढ़ क्यों गया? यह सवाल अगस्त 2026 में देश के करोड़ों पॉलिसीधारकों का है। आइए इसका पूरा गणित सरल भाषा में समझते हैं।

पहले समझिए — GST छूट का फैसला क्या था

सितंबर 2025 में हुई GST काउंसिल की 56वीं बैठक में बड़ा फैसला लिया गया था। 22 सितंबर 2025 से सभी व्यक्तिगत (इंडिविजुअल) लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों के प्रीमियम पर GST शून्य कर दिया गया। इससे पहले प्रीमियम पर 18% GST लगता था।

छूट के दायरे में क्या-क्या आया:

  • टर्म लाइफ इंश्योरेंस
  • एंडोमेंट और ULIP प्लान
  • इंडिविजुअल मेडिक्लेम और फैमिली फ्लोटर हेल्थ पॉलिसी
  • क्रिटिकल इलनेस प्लान
  • सीनियर सिटीजन हेल्थ पॉलिसी

यानी अगर आपकी फैमिली फ्लोटर पॉलिसी का बेस प्रीमियम 25,000 रुपये था, तो पहले आप 18% GST जोड़कर करीब 29,500 रुपये चुकाते थे। अब GST वाला हिस्सा नहीं लगता।

किन पॉलिसियों पर अब भी टैक्स लगता है

यह छूट सिर्फ व्यक्तिगत पॉलिसियों के लिए है। ध्यान रखें:

  • ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस (कंपनी की ओर से मिलने वाला कॉरपोरेट कवर) पर अब भी 18% GST लगता है।
  • मोटर इंश्योरेंस — कार, बाइक की पॉलिसी — पर भी 18% GST जारी है।
  • दुकान, दफ्तर और अन्य कमर्शियल बीमा पर भी GST पहले की तरह लागू है।

इसलिए अगर आप सिर्फ कंपनी के ग्रुप कवर के भरोसे हैं, तो GST छूट का सीधा फायदा आपको नहीं मिला है — यह एक और वजह है कि अपनी अलग व्यक्तिगत पॉलिसी लेना समझदारी है।

फिर प्रीमियम पूरा 18% सस्ता क्यों नहीं हुआ?

यहीं पर आता है असली पेच — इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का।

जब तक प्रीमियम पर GST लगता था, बीमा कंपनियां अपने खर्चों — एजेंट कमीशन, ब्रोकरेज, दफ्तर के खर्च, टेक्नोलॉजी — पर चुकाए गए GST का क्रेडिट (ITC) ले लेती थीं। अब जब प्रीमियम GST-मुक्त हो गया, तो नियम के मुताबिक कंपनियों को यह क्रेडिट नहीं मिलता। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनियों को जमा ITC रिवर्स भी करना पड़ा।

नतीजा — कंपनियों की लागत बढ़ी। इसलिए कई कंपनियों ने बेस प्रीमियम में कुछ बढ़ोतरी कर दी या पूरा 18% फायदा ग्राहक तक नहीं पहुंचाया। कुछ जीवन बीमा कंपनियों ने इसकी भरपाई के लिए एजेंटों का कमीशन घटाया, ताकि ग्राहक को ज्यादा फायदा दिया जा सके।

सीधी बात: GST छूट से आपका प्रीमियम घटा जरूर, लेकिन ज्यादातर मामलों में पूरे 18% के बराबर नहीं।

2026 में प्रीमियम बढ़ने की असली वजहें

GST छूट के बावजूद 2026 में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ने की खबरें लगातार आ रही हैं। जनवरी 2026 में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम कलेक्शन सालाना आधार पर करीब 27% बढ़कर 5,400 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया। आपके अपने रिन्यूअल पर असर डालने वाली मुख्य वजहें ये हैं:

  • मेडिकल महंगाई: भारत में मेडिकल इन्फ्लेशन करीब 14% है — एशिया में सबसे ऊंची। अस्पताल का बिल हर साल महंगा हो रहा है, तो बीमा कंपनियां प्रीमियम बढ़ाती हैं।
  • उम्र का असर: हर एज-बैंड (जैसे 40 से 45 साल में जाना) बदलने पर प्रीमियम अपने-आप बढ़ता है।
  • कंपनी की प्राइसिंग रिवीजन: कंपनियां समय-समय पर पूरे प्रोडक्ट का रेट बढ़ाती हैं।

रिन्यूअल ट्रेंड्स के विश्लेषण के मुताबिक करीब आधे से ज्यादा पॉलिसीधारकों (लगभग 53%) को 10% से कम की बढ़ोतरी झेलनी पड़ती है, जबकि करीब 5% ग्राहकों का प्रीमियम 30% से भी ज्यादा बढ़ जाता है — ज्यादातर उम्र बढ़ने की वजह से।

एक परिवार के लिए गणित — उदाहरण से समझें

मान लीजिए शर्मा परिवार (पति-पत्नी, दो बच्चे) की 10 लाख की फैमिली फ्लोटर पॉलिसी है।

मद GST के जमाने में (2025 से पहले) अब (2026)
बेस प्रीमियम ₹25,000 ₹27,000 (मेडिकल महंगाई से बढ़ा)
GST 18% ₹4,500 ₹0
कुल भुगतान ₹29,500 ₹27,000

यानी बेस प्रीमियम बढ़ने के बावजूद GST हटने से कुल जेब खर्च कम हुआ। लेकिन अगर बेस प्रीमियम 18% से ज्यादा बढ़ जाए (जैसे एज-बैंड बदलने पर), तो कुल रकम पहले से ज्यादा भी हो सकती है। इसीलिए कुछ लोगों को रिन्यूअल नोटिस देखकर लगता है कि GST छूट का फायदा 'गायब' हो गया।

टर्म इंश्योरेंस लेने वालों के लिए क्या बदला

टर्म प्लान पर भी GST छूट लागू है। 30 साल के व्यक्ति के 1 करोड़ के टर्म प्लान का सालाना प्रीमियम अगर पहले GST समेत करीब 15,000 रुपये पड़ता था, तो अब वही कवर सस्ता मिल रहा है। नई पॉलिसी लेने वालों के लिए यह सबसे अच्छा समय माना जा सकता है, क्योंकि उम्र जितनी कम होगी, प्रीमियम उतना ही कम लॉक होगा।

क्या करें — रिन्यूअल पर पैसे बचाने के 7 तरीके

  1. रिन्यूअल नोटिस का ब्रेकअप मांगें। देखें कि बढ़ोतरी बेस प्रीमियम में है या किसी और मद में। GST अब नहीं लगना चाहिए — अगर इंडिविजुअल पॉलिसी पर GST जुड़ा दिखे, तो कंपनी से तुरंत सवाल करें।
  2. पोर्ट करने का विकल्प देखें। अगर प्रीमियम बहुत ज्यादा बढ़ा है, तो रिन्यूअल से कम से कम 45 दिन पहले दूसरी कंपनी में पोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू करें। वेटिंग पीरियड का क्रेडिट साथ जाता है।
  3. सुपर टॉप-अप लें। बेस पॉलिसी छोटी रखकर (जैसे 5 लाख) ऊपर से 20-25 लाख का सुपर टॉप-अप लेना, सीधे बड़ी पॉलिसी से काफी सस्ता पड़ता है।
  4. मल्टी-ईयर पेमेंट देखें। कई कंपनियां 2-3 साल का प्रीमियम एक साथ देने पर छूट देती हैं और बीच में रेट बढ़ने का असर भी नहीं पड़ता।
  5. नो-क्लेम बोनस बचाएं। छोटे-मोटे खर्च (कुछ हजार रुपये) जेब से देना बेहतर हो सकता है, ताकि नो-क्लेम बोनस से सम इंश्योर्ड बढ़ता रहे।
  6. कंपनी के ग्रुप कवर के भरोसे न रहें। ग्रुप पॉलिसी पर GST भी लगता है और नौकरी छूटते ही कवर भी खत्म हो जाता है। अपनी अलग पॉलिसी जरूर रखें।
  7. सेहत सुधारें, छूट पाएं। कई कंपनियां फिटनेस ट्रैकिंग और सालाना हेल्थ चेकअप पर रिन्यूअल डिस्काउंट देती हैं — पूछना न भूलें।

आगे क्या उम्मीद करें

जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में ITC का असर धीरे-धीरे प्रीमियम में एडजस्ट होता जाएगा और कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने से ग्राहकों को बेहतर रेट मिल सकते हैं। जून 2026 में IRDAI ने एक और स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी (प्रूडेंशियल HCL हेल्थ इंश्योरेंस) को रजिस्ट्रेशन दिया है, जिससे देश में स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की संख्या आठ हो गई है। ज्यादा कंपनियां यानी ज्यादा विकल्प और बेहतर मोलभाव की गुंजाइश।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पुरानी पॉलिसी पर भी GST छूट मिलेगी? हां। छूट पॉलिसी की खरीद तारीख पर नहीं, प्रीमियम भुगतान की तारीख पर निर्भर करती है। 22 सितंबर 2025 के बाद जो भी रिन्यूअल प्रीमियम आपने भरा है, उस पर इंडिविजुअल पॉलिसी होने की स्थिति में GST नहीं लगना चाहिए।

क्या 80D की टैक्स छूट पर कोई असर पड़ा है? नहीं। हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर इनकम टैक्स की धारा 80D के तहत मिलने वाली कटौती (पुरानी टैक्स व्यवस्था में) पहले की तरह जारी है। GST छूट उससे अलग मामला है।

एजेंट कह रहा है कि GST अब भी लगेगा — क्या करूं? इंडिविजुअल लाइफ और हेल्थ पॉलिसी पर GST नहीं लगना चाहिए। प्रीमियम रसीद में टैक्स ब्रेकअप देखें। गड़बड़ी दिखे तो कंपनी के ग्रिवांस सेल में लिखित शिकायत करें।

क्या ULIP और पेंशन प्लान भी छूट में शामिल हैं? व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसियों के प्रीमियम छूट के दायरे में बताए गए हैं, लेकिन हर प्रोडक्ट की स्थिति के लिए कंपनी से लिखित पुष्टि ले लें, खासकर मिक्स्ड या ग्रुप स्ट्रक्चर वाले प्लान में।

निचोड़: GST छूट असली है और फायदा भी असली है — बस उसे मेडिकल महंगाई खा रही है। समझदारी इसी में है कि रिन्यूअल को आंख मूंदकर न भरें, ब्रेकअप देखें, विकल्पों की तुलना करें और कवर कभी बंद न होने दें। इलाज की महंगाई के इस दौर में बिना हेल्थ इंश्योरेंस रहना सबसे महंगा सौदा है।

(यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। पॉलिसी से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले पॉलिसी दस्तावेज ध्यान से पढ़ें और जरूरत हो तो सलाहकार से बात करें।)

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