अगस्त 2026 में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 26.12 प्रतिशत बढ़कर 43.81 अरब डॉलर हुआ

अगस्त 2026 में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 26.12 प्रतिशत बढ़कर 43.81 अरब डॉलर हुआ

भारत ने अगस्त 2026 के दौरान मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में 26.12 प्रतिशत की साल-दर-साल वृद्धि दर्ज की है। इस दौरान एक्सपोर्ट बढ़कर 43.81 अरब डॉलर पहुंच गया है। यह पहली बार है जब गुड्स एक्सपोर्ट की ग्रोथ ने इम्पोर्ट ग्रोथ को प्रतिशत और डॉलर दोनों टर्म्स में पीछे छोड़ दिया है। यह जानकारी कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने दी है।

15 सितंबर 2026 को जारी किए गए प्रोविजनल ट्रेड डेटा से इसकी पुष्टि हुई है। इसके अनुसार मर्चेंडाइज इम्पोर्ट 14 प्रतिशत बढ़कर 70.67 अरब डॉलर हो गया है। मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट घटकर 26.86 अरब डॉलर रह गया है।

  • अगस्त 2026 में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 26.12 प्रतिशत बढ़कर 43.81 अरब डॉलर हुआ।
  • मर्चेंडाइज इम्पोर्ट 14 प्रतिशत बढ़कर 70.67 अरब डॉलर दर्ज किया गया।
  • मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट कम होकर 26.86 अरब डॉलर पर आया।
  • सर्विसेज को शामिल करने पर ओवरऑल एक्सपोर्ट अनुमानित 82.7 अरब डॉलर रहा।
  • गोल्ड इम्पोर्ट घटकर 2.3 अरब डॉलर पर आ गया है।

अगस्त ट्रेड परफॉर्मेंस के मुख्य कारण

कॉमर्स मिनिस्ट्री के ऑफिशियल रिकॉर्ड के अनुसार 168 में से 68 प्रिंसिपल कमोडिटीज ने वॉल्यूम और वैल्यू दोनों में ग्रोथ हासिल की है। इस विस्तार के मुख्य ड्राइवर इंजीनियरिंग गुड्स, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, केमिकल्स और टेक्सटाइल्स रहे हैं। इन भारतीय एक्सपोर्ट्स की डिमांड यूनाइटेड स्टेट्स, यूरोपियन यूनियन और विभिन्न ब्रिक्स इकोनॉमी से आई है।

फिस्कल ईयर के पहले पांच महीनों के दौरान ज्योग्राफिक डायवर्सिफिकेशन ने भी भूमिका निभाई है। चाइना, सिंगापुर, जर्मनी, साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका जैसे मार्केट्स ने भारतीय सामानों की अधिक खरीद की रिपोर्ट दी है। अप्रैल से अगस्त की अवधि के लिए यूनाइटेड स्टेट्स टॉप एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन बना हुआ है। इसके बाद यूनाइटेड अरब एमिरेट्स और चाइना का स्थान है।

गोल्ड इम्पोर्ट और ट्रेड डेफिसिट के आंकड़े

समीक्षाधीन महीने के दौरान गोल्ड इम्पोर्ट में भारी गिरावट आई है। ब्रीफिंग डिटेल्स से पता चला है कि गोल्ड इनफ्लो 2.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह पिछले साल के इसी महीने में दर्ज किए गए 5.4 अरब डॉलर का आधे से भी कम है। यह स्पेसिफिक डिटेल इस बात का उदाहरण है कि घरेलू खपत के पैटर्न ट्रेड बैलेंस को कैसे प्रभावित करते हैं।

अगस्त 2025 में दर्ज किए गए 27.22 अरब डॉलर और जुलाई में देखे गए लगभग 32 अरब डॉलर के डेफिसिट की तुलना में यह गिरावट आई है। सेवाओं को हिसाब में लेने पर ओवरऑल एक्सपोर्ट अनुमानित 82.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह 25.4 प्रतिशत की छलांग को दर्शाता है।

इकोनॉमिक इम्प्लिकेशन और फ्यूचर आउटलुक

रुपये और करेंट अकाउंट पर दबाव कम होने से पॉलिसीमेसर्स को थोड़ी राहत मिली है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पहले अप्रैल से जून तिमाही के लिए करेंट अकाउंट 4.2 अरब डॉलर या जीडीपी का 0.5 प्रतिशत रिपोर्ट किया था। हालांकि एनर्जी सेक्टर देश के लिए वोलैटिलिटी का एक सोर्स बना हुआ है।

क्रूड ऑयल की कीमतें 107 से 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मंडराने के कारण रिफाइनर्स और इम्पोर्टर्स को रिस्क का सामना करना पड़ रहा है। 14 सितंबर 2026 को जारी होलसेल इन्फ्लेशन डेटा में उच्च ईंधन लागत का असर दिखा। यह बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई। इसी अवधि के लिए रिटेल इन्फ्लेशन 4.82 प्रतिशत रही।

मार्केट एनालिस्ट्स की प्रतिक्रिया और आगामी समझौते

पॉजिटिव मंथली प्रिंट के बावजूद मार्केट एनालिस्ट्स सतर्क बने हुए हैं। फ्यूचर असेसमेंट सितंबर ट्रेड डेटा और यूरोपियन यूनियन तथा कनाडा के साथ ट्रेड एग्रीमेंट पर फोकस करेंगे। अधिकारियों को उम्मीद है कि 2026 के अंत तक इन समझौतों से शिपिंग वॉल्यूम को और बढ़ावा मिलेगा।

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