बीमा मिस-सेलिंग पर IRDAI सख्त: पॉलिसी पर छपेगा एजेंट का नाम

बीमा खरीदते समय सबसे बड़ा डर क्या होता है? यह नहीं कि प्रीमियम कितना है — डर यह है कि एजेंट ने जो कहा, पॉलिसी में वही है भी या नहीं। "5 साल में पैसा डबल", "कभी भी निकाल लेना", "यह FD से बेहतर है" — ऐसी बातें सुनकर खरीदी गई पॉलिसी जब 2–3 साल बाद सरेंडर करने पर आधी रकम भी नहीं लौटाती, तब पता चलता है कि मिस-सेलिंग क्या होती है।
अच्छी खबर यह है कि बीमा नियामक IRDAI ने 2026 में इस समस्या पर एक साथ कई मोर्चों पर काम शुरू किया है। जुलाई के आखिर में हुई 137वीं बैठक में ऐसे नियम मंजूर हुए हैं जो हर पॉलिसी पर बेचने वाले का नाम दर्ज करना अनिवार्य बनाते हैं, और नियामक एजेंट-कमीशन के पूरे ढांचे को बदलने की तैयारी में है। साथ ही FY26 के शिकायत आंकड़े भी सामने हैं, जो बताते हैं कि परिवारों को कहां सबसे ज़्यादा परेशानी हो रही है।
इस लेख में समझिए — नया क्या बदला है, आंकड़े क्या कहते हैं, और अगर आपके साथ गलत पॉलिसी बेची गई है तो आप क्या कर सकते हैं।
FY26 में कितनी शिकायतें आईं?
IRDAI के शिकायत पोर्टल बीमा भरोसा (पुराना नाम IGMS) पर वित्त वर्ष 2025-26 में उद्योग को लगभग 2.97 लाख शिकायतें मिलीं, जिनमें से करीब 2.87 लाख का निपटारा हुआ।
| श्रेणी | शिकायतें मिलीं (FY26) | निपटाईं | लंबित |
|---|---|---|---|
| जीवन बीमा | लगभग 1.19 लाख | लगभग 1.18 लाख | 598 |
| स्वास्थ्य बीमा (स्टैंडअलोन) | 1,17,979 | 1,12,315 | 5,664 |
| अन्य जनरल बीमा (मोटर आदि) | 60,462 | 56,752 | 3,710 |
स्रोत: बीमा भरोसा डेटा, FY26 (Cafemutual रिपोर्ट के अनुसार)
कुछ बातें साफ दिखती हैं:
- स्वास्थ्य बीमा में लंबित शिकायतों का अनुपात सबसे ज़्यादा है — यानी यहां झगड़े लंबे खिंचते हैं।
- जीवन बीमा में शिकायतों की संख्या बड़ी है, लेकिन निपटारा तेज़ है।
- जनरल बीमा (मोटर, घर, यात्रा) की शिकायतें पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ी हैं — उद्योग रिपोर्टों में FY26 में जनरल बीमा शिकायतों के 2021-22 की तुलना में करीब तीन गुना होने की बात कही गई है।
मिस-सेलिंग की शिकायतें: "चिंताजनक स्तर"
IRDAI की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार जीवन बीमा में "अनुचित व्यापार व्यवहार" (Unfair Business Practice) — यानी मिस-सेलिंग — की शिकायतें FY24 के 23,335 से बढ़कर FY25 में 26,667 हो गईं, करीब 14% की बढ़ोतरी। ये जीवन बीमा की कुल शिकायतों का 22.14% थीं।
और सबसे परेशान करने वाली बात: FY25 में निपटाई गई मिस-सेलिंग शिकायतों में 15,000 से ज़्यादा पॉलिसीधारक के खिलाफ गईं, जबकि करीब 11,400 में पूरी या आंशिक राहत मिली। यानी शिकायत करने वालों में से आधे से ज़्यादा को कुछ नहीं मिला — अक्सर इसलिए कि उनके पास सबूत नहीं था कि एजेंट ने क्या वादा किया था।
IRDAI के सदस्य सत्यजीत त्रिपाठी पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि जीवन बीमा में प्रोडक्ट मिस-सेलिंग की शिकायतें चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई हैं। यह भी ध्यान देने लायक है कि FY25 में व्यक्तिगत नए प्रीमियम का लगभग 49% अकेले बैंकों के ज़रिए आया — और बैंक शाखा में "FD के साथ यह भी ले लीजिए" वाली बिक्री मिस-सेलिंग का सबसे बड़ा स्रोत मानी जाती है।
बदलाव 1: हर पॉलिसी पर बेचने वाले का नाम — 1 जनवरी 2027 से
जुलाई 2026 के अंत में IRDAI की 137वीं बैठक में मंज़ूर बीमा मध्यस्थ (संशोधन) विनियम, 2026 के तहत:
- हर प्रस्ताव फॉर्म, पॉलिसी दस्तावेज़ और बीमा प्रमाणपत्र पर उस अधिकृत सेल्सपर्सन का नाम और पहचान संख्या छपेगी जिसने पॉलिसी बेची।
- साथ में उस शाखा/कार्यालय का मोबाइल नंबर और ईमेल भी होगा जहां से पॉलिसी बिकी।
- अगर पॉलिसी किसी ऐप/वेबसाइट से बिना किसी सेल्सपर्सन के खरीदी गई, तो उस मध्यस्थ के प्रिंसिपल ऑफिसर के संपर्क विवरण छपेंगे।
- रिपोर्टों के अनुसार यह नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होगा।
परिवारों के लिए इसका मतलब: अब "किसने बेचा था, पता नहीं" वाली स्थिति खत्म होगी। मिस-सेलिंग की शिकायत पर बीमा कंपनी और नियामक सीधे उस व्यक्ति तक पहुंच सकेंगे।
इसी बैठक में पॉलिसीधारक शिक्षा एवं संरक्षण कोष (PEPF) के नियम, दंड लगाने की एकसमान प्रक्रिया वाले पेनल्टी रेगुलेशन 2026, और मध्यस्थों के लिए सालाना फीस के साथ स्थायी पंजीकरण को भी मंज़ूरी मिली। PEPF का एक काम लावारिस (unclaimed) बीमा राशि का पता लगाकर सही हकदार तक पहुंचाना भी होगा।
बदलाव 2: एजेंट कमीशन का ढांचा बदलने की तैयारी
जुलाई 2026 की शुरुआत में IRDAI चेयरमैन अजय सेठ ने कहा था कि वितरण सुधारों पर एक परामर्श पत्र (consultation paper) जुलाई के अंत तक आ सकता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रस्ताव की दिशा यह है:
- अभी कुछ जीवन और स्वास्थ्य बीमा उत्पादों पर वितरक को प्रीमियम का 40% तक कमीशन मिल सकता है, और उसका बड़ा हिस्सा बिक्री के समय ही मिल जाता है।
- प्रस्ताव है कि कमीशन एकमुश्त देने की बजाय पॉलिसी की पूरी अवधि में किस्तों में (trail commission) दिया जाए — ताकि एजेंट का फायदा तब हो जब ग्राहक पॉलिसी चालू रखे।
- यह भी विचार है कि कमीशन को मेहनत से जोड़ा जाए — जो एजेंट सलाह देता है और क्लेम में मदद करता है, उसे ज़्यादा; जो सिर्फ "ऐड-ऑन" की तरह बेचता है, उसे कम।
- उत्पाद-वार कमीशन सीमा और सख्त खुलासे (disclosure) भी चर्चा में हैं।
अभी यह प्रस्ताव के स्तर पर है; अंतिम नियम परामर्श के बाद ही बनेंगे। लेकिन दिशा साफ है — "बेचो और भूल जाओ" मॉडल पर लगाम।
मिस-सेलिंग के 7 संकेत जो परिवार तुरंत पहचान सकते हैं
- "गारंटीड रिटर्न" की बात लेकिन बेनिफिट इलस्ट्रेशन में 4% और 8% के दो कॉलम — मतलब रिटर्न गारंटीड नहीं है।
- लोन, FD या लॉकर के साथ पॉलिसी "ज़रूरी" बताई जाए — बीमा किसी भी बैंकिंग सेवा की शर्त नहीं हो सकता।
- प्रीमियम अवधि और पॉलिसी अवधि का फर्क न बताया जाए — "सिर्फ 5 साल भरना है" के बाद 20 साल तक पैसा फंसा रहता है।
- सरेंडर वैल्यू पर चुप्पी — पहले 2–3 साल में छोड़ने पर कितना वापस मिलेगा, यह पूछिए।
- बुज़ुर्ग माता-पिता को 15–20 साल की बचत योजना — जब ज़रूरत स्वास्थ्य कवर की हो।
- फॉर्म खुद भरने का आग्रह — "आप बस साइन कर दीजिए, बाकी हम देख लेंगे।"
- फोन पर "बोनस/रिफंड अटका है, नई पॉलिसी लेनी होगी" — यह सीधा फ्रॉड है, IRDAI ऐसी कोई कॉल नहीं करता।
गलत पॉलिसी बिक गई? यह रास्ता अपनाएं
चरण 1 — फ्री-लुक पीरियड का इस्तेमाल करें। नई पॉलिसी मिलने के बाद एक निश्चित अवधि (नियमों के अनुसार अब 30 दिन) में बिना कारण बताए पॉलिसी लौटाई जा सकती है; प्रीमियम में से सिर्फ़ स्टाम्प ड्यूटी, मेडिकल खर्च और उतने दिनों का जोखिम प्रीमियम कटता है। पॉलिसी दस्तावेज़ मिलते ही पढ़ लें — यह खिड़की सबसे सस्ता इलाज है।
चरण 2 — बीमा कंपनी के शिकायत अधिकारी (GRO) को लिखें। ईमेल/पत्र में पॉलिसी नंबर, एजेंट का नाम, क्या वादा किया गया और क्या मिला — सब लिखें। कंपनी को तय समय में जवाब देना होता है।
चरण 3 — बीमा भरोसा पोर्टल (bimabharosa.irdai.gov.in)। अगर कंपनी से संतोषजनक जवाब न मिले या 15 दिन में जवाब न आए, तो IRDAI के पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें; टोल-फ्री 155255 / 1800 4254 732 पर भी कॉल कर सकते हैं। शिकायत ट्रैक करने के लिए टोकन नंबर संभाल कर रखें।
चरण 4 — बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman)। ₹50 लाख तक के विवाद पर निःशुल्क। देश में 17 लोकपाल कार्यालय हैं; CIO की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार FY25 में 53,184 शिकायतें आईं और लगभग 71% मामलों में फैसला पॉलिसीधारक के पक्ष में (अवॉर्ड/सिफारिश) गया। लोकपाल का फैसला बीमा कंपनी पर बाध्यकारी होता है।
चरण 5 — उपभोक्ता आयोग। अगर रकम बड़ी है या लोकपाल से संतुष्ट नहीं हैं, तो उपभोक्ता आयोग का रास्ता खुला है।
क्या करें — परिवार के लिए चेकलिस्ट
- हर बातचीत का सबूत रखें। एजेंट से वादे WhatsApp/ईमेल पर लिखवा लें। FY25 में आधे से ज़्यादा मिस-सेलिंग शिकायतें इसीलिए हारीं क्योंकि सबूत नहीं था।
- बेनिफिट इलस्ट्रेशन पर खुद साइन करें, पढ़कर। जहां "गारंटीड" और "नॉन-गारंटीड" अलग कॉलम हों, वहां सिर्फ गारंटीड वाला कॉलम ही असली है।
- बीमा और निवेश अलग रखें। परिवार के लिए पहले शुद्ध टर्म प्लान और स्वास्थ्य बीमा; बचत के लिए PPF/म्यूचुअल फंड/FD की तुलना करें।
- बैंक में पॉलिसी "शर्त" बताई जाए तो लिखित में मांगें — ऐसा कोई नियम नहीं है।
- पॉलिसी दस्तावेज़ मिलते ही 30 दिन के भीतर पढ़ लें और फर्क दिखे तो फ्री-लुक में लौटा दें।
- 1 जनवरी 2027 के बाद पॉलिसी पर छपा सेल्सपर्सन का नाम/ID जांचें — अगर वह वही व्यक्ति नहीं जिसने आपको बेचा, तो तुरंत कंपनी को बताएं।
- अनजान कॉल पर कोई पॉलिसी नहीं। "IRDAI से बोल रहे हैं" कहकर पैसे मांगने वाले ठग हैं।
आखिरी बात
नियम बदल रहे हैं — बेचने वाले का नाम पॉलिसी पर छपेगा, कमीशन का लालच घटाने की तैयारी है, और शिकायत का रास्ता पहले से ज़्यादा डिजिटल और पारदर्शी है। लेकिन इन सबका फायदा उसी परिवार को मिलेगा जो खरीदने से पहले पढ़ता है और बाद में सबूत संभाल कर रखता है। अगली बार कोई कहे "बस साइन कर दीजिए" — रुकिए, पढ़िए, फिर फैसला कीजिए।
अस्वीकरण: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नियामकीय जानकारी और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। कमीशन सुधार अभी प्रस्ताव स्तर पर हैं; अंतिम नियमों के लिए IRDAI की अधिसूचना देखें। किसी भी पॉलिसी पर फैसला अपने दस्तावेज़ पढ़कर और ज़रूरत हो तो योग्य सलाहकार से पूछकर करें।
कवर फोटो: PIYUSH P PUJARI / CC BY-SA 4.0