ITR फाइल कर दिया? 30 दिन में ई-वेरिफिकेशन नहीं किया तो रिटर्न होगा अमान्य

31 अगस्त 2026 की डेडलाइन नजदीक है और लाखों टैक्सपेयर्स अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) जल्दी-जल्दी फाइल कर रहे हैं। लेकिन एक बात बहुत से लोग भूल जाते हैं — सिर्फ ITR फाइल करना काफी नहीं है। जब तक आप उसे वेरिफाई नहीं करते, आयकर विभाग की नजर में आपका रिटर्न "अधूरा" रहता है। और अगर तय समय में वेरिफिकेशन नहीं हुआ, तो पूरा रिटर्न अमान्य (invalid) मान लिया जाता है — जैसे आपने फाइल किया ही नहीं।
यह नियम नया नहीं है, लेकिन हर साल हजारों लोग इसे नजरअंदाज करके परेशानी में पड़ जाते हैं। आइए समझते हैं यह 30 दिन वाला नियम असल में काम कैसे करता है।
30 दिन का नियम क्या है
पहले ITR वेरिफाई करने के लिए 120 दिन का समय मिलता था। कुछ साल पहले आयकर विभाग ने इस समयसीमा को घटाकर 30 दिन कर दिया। यानी जिस दिन आप ITR ऑनलाइन अपलोड करते हैं, उस दिन से 30 दिन के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन पूरा करना जरूरी है।
यह तारीख की गणना कैसे प्रभावित करती है, इसे एक उदाहरण से समझें:
- अगर आपने ITR 26 अगस्त 2026 को फाइल किया और 15 सितंबर 2026 को (यानी 30 दिन के भीतर) वेरिफाई कर दिया — तो आपकी फाइलिंग की तारीख 26 अगस्त ही मानी जाएगी।
- लेकिन अगर आपने वेरिफिकेशन 30 दिन के बाद किया — तो वेरिफिकेशन वाली तारीख को ही फाइलिंग की तारीख माना जाएगा। अगर यह तारीख डेडलाइन (31 अगस्त) के बाद है, तो आपका रिटर्न "लेट फाइल्ड" माना जाएगा और उससे जुड़े सभी नुकसान — जैसे लेट फीस — लागू होंगे।
- अगर 30 दिन के भीतर वेरिफिकेशन बिल्कुल नहीं हुआ, तो रिटर्न को अमान्य (invalid) माना जाता है — यानी माना जाएगा कि आपने रिटर्न फाइल ही नहीं किया।

वेरिफिकेशन क्यों जरूरी है
आयकर विभाग आपके रिटर्न की प्रोसेसिंग तभी शुरू करता है जब वेरिफिकेशन पूरा हो जाता है। इसका मतलब है:
- जब तक वेरिफिकेशन नहीं होगा, रिफंड की प्रोसेसिंग शुरू नहीं होगी
- रिटर्न को कानूनी तौर पर "वैध" तभी माना जाएगा जब वेरिफिकेशन पूरा हो
- अगर रिटर्न अमान्य हो गया, तो नियमों के तहत आपको वैसे ही जुर्माना और परिणाम झेलने पड़ सकते हैं जैसे रिटर्न फाइल ही न किया हो
ई-वेरिफिकेशन के 5 आसान तरीके
अच्छी बात यह है कि ई-वेरिफिकेशन प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन और कुछ ही मिनटों में हो जाती है। आयकर विभाग की वेबसाइट पर लॉगिन करके नीचे दिए गए किसी भी तरीके से यह किया जा सकता है:
| तरीका | कैसे काम करता है |
|---|---|
| आधार OTP | आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर आया OTP डालें |
| नेट बैंकिंग | अपने बैंक अकाउंट से लॉगिन करके सीधे वेरिफाई करें |
| बैंक अकाउंट EVC | प्री-वैलिडेटेड बैंक अकाउंट से इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड जनरेट करें |
| डीमैट अकाउंट EVC | डीमैट अकाउंट के जरिए EVC जनरेट करके वेरिफाई करें |
| डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) | जिनके पास DSC है, वे इससे सीधे साइन करके वेरिफाई कर सकते हैं |
अगर ऑनलाइन कोई तरीका काम न करे, तो आखिरी विकल्प है — ITR-V फॉर्म पर हस्ताक्षर करके उसकी हस्ताक्षरित कॉपी 30 दिन के भीतर डाक से CPC, बेंगलुरु भेजना।

अगर 30 दिन निकल जाएं तो क्या करें
अगर किसी वजह से 30 दिन के भीतर वेरिफिकेशन नहीं हो पाया, तो पूरी तरह निराश होने की जरूरत नहीं है। आयकर विभाग की वेबसाइट पर "कंडोनेशन रिक्वेस्ट" (Condonation Request) डालने का विकल्प है। इसमें आपको देरी की सही वजह बतानी होती है — जैसे तकनीकी दिक्कत, बीमारी, या कोई और वाजिब कारण। अगर विभाग वजह को सही मानता है, तो देरी माफ करके रिटर्न को वैध माना जा सकता है। लेकिन यह विभाग के विवेक पर निर्भर करता है, इसलिए समय पर वेरिफिकेशन करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
क्या करें
- ITR फाइल करने के तुरंत बाद, उसी दिन या अगले 1-2 दिन में वेरिफिकेशन कर लें — देर मत करें
- आधार OTP या नेट बैंकिंग जैसा तेज तरीका चुनें, यह 2 मिनट में पूरा हो जाता है
- वेरिफिकेशन के बाद अपनी ईमेल पर आया कन्फर्मेशन जरूर चेक करें
- अगर परिवार के किसी बुजुर्ग सदस्य का रिटर्न भी आप फाइल करा रहे हैं, तो उनका वेरिफिकेशन भी खुद निगरानी में पूरा कराएं
- 30 दिन निकल जाने पर तुरंत कंडोनेशन रिक्वेस्ट डालें, देरी न करें
- अपने रिटर्न का स्टेटस समय-समय पर incometax.gov.in पोर्टल पर लॉगिन करके चेक करते रहें
ITR फाइल करना आधा काम है — असली फाइलिंग वेरिफिकेशन के साथ पूरी होती है। 31 अगस्त की डेडलाइन के दबाव में रिटर्न फाइल करने के बाद यह आखिरी और सबसे जरूरी कदम भूलें नहीं, वरना पूरी मेहनत बेकार जा सकती है।
कवर फोटो: Ministry of Ports, Shipping and Waterways / GODL-India