लोन सेटलमेंट या डिफॉल्ट: कौन सा CIBIL स्कोर को ज्यादा बिगाड़ता है? 2026 में जानें पूरा सच

लोन सेटलमेंट या डिफॉल्ट: कौन सा CIBIL स्कोर को ज्यादा बिगाड़ता है? 2026 में जानें पूरा सच

जब EMI चुकाना मुश्किल हो जाए तो ज्यादातर लोग दो रास्तों में उलझ जाते हैं - या तो बैंक के साथ लोन सेटलमेंट कर लें, या फिर पेमेंट रोककर डिफॉल्ट की स्थिति में चले जाएं। दोनों ही विकल्प CIBIL स्कोर को नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन कितना नुकसान होगा और यह असर कितने साल तक रहेगा - यह समझना बेहद जरूरी है। 2026 में क्रेडिट रिपोर्टिंग पर पहले से ज्यादा बारीकी से नजर रखी जा रही है, इसलिए यह फैसला आपके अगले कई साल के फाइनेंशियल भविष्य को तय कर सकता है।

लोन सेटलमेंट क्या होता है

लोन सेटलमेंट में बैंक या NBFC आपकी पूरी बकाया रकम के बदले उससे कम राशि लेकर खाता बंद करने पर राजी हो जाता है। यह तब होता है जब कर्जदार आर्थिक तंगी की वजह से पूरी रकम चुकाने में असमर्थ हो जाता है।

  • बैंक आपकी मूल राशि से कम पर समझौता करता है
  • बकाया लोन खाता बंद हो जाता है
  • लेकिन CIBIL रिपोर्ट पर स्टेटस "Settled" दिखता है, "Closed" नहीं

डिफॉल्ट क्या होता है

डिफॉल्ट का मतलब है कि आपने EMI भरना पूरी तरह बंद कर दिया और बैंक ने आपको जानबूझकर भुगतान न करने वाला (विलफुल डिफॉल्टर या NPA खाता) घोषित कर दिया।

  • लगातार 90 दिन तक EMI न चुकाने पर खाता Non-Performing Asset (NPA) बन जाता है
  • बैंक रिकवरी एजेंट या कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकता है
  • CIBIL रिपोर्ट पर "Written Off" या "Default" जैसी एंट्री आती है

किसका असर ज्यादा बुरा है

CIBIL स्कोर पर गिरावट

  • लोन सेटलमेंट होने पर स्कोर आमतौर पर 75 से 100 पॉइंट तक गिर सकता है
  • पूरी तरह डिफॉल्ट या राइट-ऑफ होने पर गिरावट इससे भी ज्यादा गहरी और लंबी होती है, क्योंकि इसमें रिकवरी की कोई कोशिश नहीं दिखती
  • सेटलमेंट को डिफॉल्ट से थोड़ा "बेहतर" माना जाता है क्योंकि इसमें कर्जदार ने कुछ भुगतान करने की कोशिश तो दिखाई, भले ही पूरी रकम न चुकाई हो

रिपोर्ट पर कितने साल दिखता है

  • "Settled" टैग आपकी क्रेडिट रिपोर्ट पर रिपोर्टिंग की तारीख से 7 साल तक बना रह सकता है
  • इस दौरान कोई भी नया बैंक या NBFC आपकी रिपोर्ट देखकर तुरंत सतर्क हो जाता है, क्योंकि यह टैग साफ बताता है कि आपने अपनी मूल शर्तों को पूरा नहीं किया

दोनों के भविष्य पर असर

स्थिति तुरंत असर भविष्य में लोन मिलना
पूरा भुगतान (Closed) कोई नकारात्मक असर नहीं आसान, सबसे अच्छा विकल्प
सेटलमेंट (Settled) स्कोर में 75-100 पॉइंट गिरावट मुश्किल, 7 साल तक टैग दिखता है
डिफॉल्ट/राइट-ऑफ गहरी और लंबी गिरावट, कानूनी नोटिस संभव बहुत मुश्किल, नए लोन में रिजेक्शन की संभावना ज्यादा

यह टेबल दिखाती है कि दोनों ही रास्ते नुकसानदेह हैं, लेकिन डिफॉल्ट को सेटलमेंट से ज्यादा गंभीर माना जाता है क्योंकि इसमें बैंक को रिकवरी के लिए कानूनी कदम तक उठाने पड़ सकते हैं।

सेटलमेंट के बाद क्या-क्या दिक्कतें आती हैं

  • नया होम लोन, कार लोन या क्रेडिट कार्ड मिलना मुश्किल हो जाता है
  • अगर कोई नया लोन मिल भी जाए तो ब्याज दर सामान्य से ज्यादा वसूली जा सकती है
  • कुछ नौकरियों में बैकग्राउंड चेक के दौरान क्रेडिट हिस्ट्री देखी जाती है, जिस पर यह टैग असर डाल सकता है
  • को-एप्लिकेंट या गारंटर के तौर पर किसी और के लोन में शामिल होना भी कठिन हो जाता है

क्या करें - सही रास्ता कैसे चुनें

  • पहले बैंक से बात करें: EMI चुकाने में दिक्कत होते ही तुरंत बैंक या NBFC से संपर्क करें। कई बार पुनर्गठन (Restructuring) या EMI मोरेटोरियम जैसे विकल्प मिल सकते हैं जिनसे डिफॉल्ट या सेटलमेंट दोनों से बचा जा सकता है
  • डिफॉल्ट से हर हाल में बचें: अगर सेटलमेंट और डिफॉल्ट के बीच चुनना ही पड़े, तो सेटलमेंट अपेक्षाकृत कम नुकसानदेह विकल्प है
  • सेटलमेंट के बाद भी कोशिश जारी रखें: कुछ बैंक बाद में बकाया शेष राशि चुकाने पर रिपोर्ट को "Settled" से अपडेट कर सकते हैं, इसके लिए सीधे बैंक से लिखित पुष्टि लें
  • छोटे सिक्योर्ड लोन या क्रेडिट कार्ड से दोबारा शुरुआत करें: सेटलमेंट के बाद स्कोर सुधारने के लिए समय पर EMI चुकाने वाला ट्रैक रिकॉर्ड दोबारा बनाना जरूरी है
  • नियमित रूप से अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें: यह पक्का करने के लिए कि सेटलमेंट या क्लोजर की एंट्री सही तरीके से अपडेट हुई है
  • इमरजेंसी फंड बनाएं: भविष्य में EMI मिस होने से बचने के लिए 3-6 महीने के खर्च जितनी बचत अलग रखें

कुल मिलाकर, अगर बकाया रकम है और चुकाने की कोई गुंजाइश बन सकती है, तो पूरा भुगतान करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। सेटलमेंट सिर्फ मजबूरी में आखिरी विकल्प के तौर पर अपनाना चाहिए, क्योंकि इसका असर अगले सात साल तक आपकी क्रेडिट प्रोफाइल पर बना रहता है।

कवर फोटो: Solargis / CC BY 4.0

कवर फोटो: Ministry of Finance of India / GODL-India

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