अगस्त 2026 में MCLR: HDFC ने घटाई, BoB-केनरा ने बढ़ाई, EMI पर क्या असर

अगस्त 2026 में MCLR: HDFC ने घटाई, BoB-केनरा ने बढ़ाई, EMI पर क्या असर

अगस्त 2026 में भारतीय कर्जदारों के लिए ब्याज दरों की तस्वीर थोड़ी उलझी हुई है। RBI ने 5 अगस्त की मौद्रिक नीति में रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखा, लेकिन उसके बाद बैंकों ने अपनी MCLR (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) में अलग-अलग दिशा में बदलाव किए हैं। HDFC बैंक ने दरें घटाईं, तो बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक और बैंक ऑफ इंडिया ने कुछ अवधियों की दरें बढ़ा दीं। SBI और PNB ने दरें जस की तस रखीं, जबकि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की नई दरें 21 अगस्त से लागू हुई हैं।

अगर आपका होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन MCLR से जुड़ा है, तो यह खबर सीधे आपकी EMI से जुड़ी है। आइए समझते हैं कि इस हफ्ते किस बैंक ने क्या किया, किस पर असर पड़ेगा और आपको क्या करना चाहिए।

होम लोन दस्तावेज और EMI कैलकुलेटर
MCLR में 5 बेसिस पॉइंट का बदलाव भी लंबी अवधि के होम लोन की EMI पर असर डालता है। (फोटो: iMahesh / CC BY-SA 4.0)

पहले समझें: MCLR क्या है और आप पर कैसे लागू होता है

MCLR वह न्यूनतम दर है जिससे नीचे बैंक (कुछ अपवादों को छोड़कर) कर्ज नहीं दे सकता। बैंक हर महीने अपनी फंड की लागत के हिसाब से MCLR तय करते हैं। इसमें ओवरनाइट, 1 महीना, 3 महीना, 6 महीना, 1 साल, 2 साल और 3 साल की अलग-अलग दरें होती हैं।

  • अक्टूबर 2019 से पहले लिए गए ज्यादातर फ्लोटिंग रेट रिटेल लोन MCLR से जुड़े हैं।
  • अक्टूबर 2019 के बाद के ज्यादातर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन रेपो रेट यानी एक्सटर्नल बेंचमार्क (EBLR/RLLR) से जुड़े हैं। ऐसे लोन पर MCLR बदलने का सीधा असर नहीं पड़ता।
  • MCLR वाले लोन की दर हर महीने नहीं बदलती, बल्कि रीसेट डेट (आमतौर पर 6 या 12 महीने) पर बदलती है।

इसलिए सबसे पहला काम यह पता करना है कि आपका लोन किस बेंचमार्क से जुड़ा है। यह जानकारी लोन के सैंक्शन लेटर, बैंक की ऐप या स्टेटमेंट में "Benchmark" या "Reference Rate" के नाम से लिखी होती है।

किस बैंक ने क्या बदला: अगस्त 2026 की पूरी सूची

HDFC बैंक: 5 बेसिस पॉइंट की कटौती (7 अगस्त से)

देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC ने 7 अगस्त 2026 से अपनी MCLR सात में से छह अवधियों पर 5 बेसिस पॉइंट (0.05%) घटाई है। सिर्फ 2 साल की MCLR को अपरिवर्तित रखा गया। एक साल की MCLR, जिससे ज्यादातर रिटेल लोन जुड़े होते हैं, 8.45% से घटकर 8.40% हो गई। अब HDFC बैंक की MCLR 8.00% से 8.65% के दायरे में है।

गौर करने वाली बात यह है कि जुलाई 2026 में HDFC बैंक ने 1 साल और 3 साल की MCLR 5 बेसिस पॉइंट बढ़ाई थी। यानी अगस्त की कटौती ने जुलाई की बढ़ोतरी को वापस ले लिया है।

बैंक ऑफ बड़ौदा: 3 महीने की दर 10 बेसिस पॉइंट बढ़ी (12 अगस्त से)

बैंक ऑफ बड़ौदा ने 12 अगस्त 2026 से सिर्फ 3 महीने की MCLR में बदलाव किया, जो 8.20% से बढ़कर 8.30% हो गई। बाकी अवधियां जस की तस हैं:

  • ओवरनाइट: 7.85%
  • 1 महीना: 7.95%
  • 6 महीना: 8.50%
  • 1 साल: 8.75%

चूंकि रिटेल लोन ज्यादातर 1 साल की MCLR से जुड़े होते हैं, इसलिए BoB के आम होम लोन ग्राहकों पर इस बदलाव का असर सीमित रहेगा। 3 महीने की MCLR से जुड़े कुछ बिजनेस या वर्किंग कैपिटल लोन जरूर थोड़े महंगे होंगे।

केनरा बैंक: ओवरनाइट छोड़कर सभी अवधियों पर 5 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी (12 अगस्त से)

केनरा बैंक ने भी 12 अगस्त 2026 से MCLR बढ़ाई है। ओवरनाइट दर 7.95% पर स्थिर है, लेकिन बाकी सभी अवधियों पर 5 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई:

  • 1 महीना: 8.00% से 8.05%
  • 3 महीना: 8.25% से 8.30%
  • 6 महीना: 8.60% से 8.65%
  • 1 साल: 8.75% से 8.80%
  • 2 साल: 9.05%
  • 3 साल: 9.10%

बैंक ऑफ इंडिया: 1 साल की MCLR 8.75% से 8.80%

बैंक ऑफ इंडिया ने जुलाई के अंत में घोषणा की थी कि उसकी बेंचमार्क 1 साल की MCLR 5 बेसिस पॉइंट बढ़कर 8.80% हो रही है। यानी अगस्त में BoI के MCLR वाले ग्राहकों की रीसेट पर दर थोड़ी ऊपर जाएगी।

SBI, PNB और यूनियन बैंक: दरें स्थिर

  • SBI की 15 अगस्त 2026 से लागू MCLR में कोई बदलाव नहीं हुआ। ओवरनाइट और 1 महीना 7.85%, 3 महीना 8.25%, 6 महीना 8.60%, 1 साल 8.70%, 2 साल 8.75% और 3 साल 8.80%। यह दरें जुलाई जैसी ही हैं।
  • PNB ने 1 अगस्त 2026 से लागू MCLR में जुलाई की दरें बरकरार रखीं: ओवरनाइट 8.00%, 1 महीना 8.25%, 3 महीना 8.45%, 6 महीना 8.65%, 1 साल 8.80%, 3 साल 9.10%। PNB की रेपो-लिंक्ड RLLR 8.10% है (रेपो 5.25% + मार्कअप 2.50% + BSP 0.35%)।
  • यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की 21 अगस्त 2026 से लागू MCLR: ओवरनाइट 7.90%, 1 महीना 8.10%, 3 महीना 8.35%, 6 महीना 8.65%, 1 साल 8.80%, 2 साल 8.95%, 3 साल 9.05%। बैंक की EBLR 8.00% है।
रुपये के नोट और बैंक पासबुक
SBI और PNB ने अगस्त में MCLR स्थिर रखी, जबकि केनरा और बैंक ऑफ इंडिया ने बढ़ाई। (फोटो: Raghavan2010 / CC BY-SA 4.0)

एक नजर में: प्रमुख बैंकों की 1 साल की MCLR (अगस्त 2026)

बैंक 1 साल की MCLR इस महीने बदलाव
SBI 8.70% कोई बदलाव नहीं (15 अगस्त)
HDFC बैंक 8.40% 5 bps घटी (7 अगस्त)
बैंक ऑफ बड़ौदा 8.75% कोई बदलाव नहीं; 3 माह की दर 10 bps बढ़ी
केनरा बैंक 8.80% 5 bps बढ़ी (12 अगस्त)
PNB 8.80% कोई बदलाव नहीं (1 अगस्त)
यूनियन बैंक 8.80% 21 अगस्त से लागू
बैंक ऑफ इंडिया 8.80% 5 bps बढ़ी

5 या 10 बेसिस पॉइंट से EMI पर कितना फर्क पड़ता है?

5 बेसिस पॉइंट यानी सिर्फ 0.05%। सुनने में बहुत छोटा लगता है, लेकिन लंबी अवधि के होम लोन पर यह धीरे-धीरे जुड़ता है। नीचे 20 साल के लोन पर अनुमानित EMI देखिए:

लोन राशि दर अनुमानित EMI 5 bps बढ़ने पर EMI फर्क
30 लाख, 20 साल 8.75% लगभग 26,510 रुपये 8.80% पर लगभग 26,610 रुपये लगभग 95 से 100 रुपये/माह
30 लाख, 20 साल 8.75% लगभग 26,510 रुपये 8.85% (10 bps) पर लगभग 26,700 रुपये लगभग 190 रुपये/माह
50 लाख, 20 साल 8.45% लगभग 43,230 रुपये 8.40% (5 bps कम) पर लगभग 43,080 रुपये लगभग 155 रुपये/माह की बचत

ध्यान रहे, ये आंकड़े सिर्फ MCLR पर आधारित हैं। आपकी असली दर MCLR + स्प्रेड होती है, इसलिए हर ग्राहक की EMI अलग होगी। आमतौर पर बैंक EMI की रकम नहीं बदलते बल्कि लोन की अवधि घटा या बढ़ा देते हैं, जब तक आप खुद EMI बदलने को न कहें।

रेपो रेट स्थिर है, फिर MCLR क्यों बढ़ रही है?

यह सवाल कई कर्जदारों के मन में है। रेपो रेट दिसंबर 2025 से 5.25% पर है और अगस्त 2026 की बैठक में भी RBI ने इसे नहीं छेड़ा। फिर भी कुछ बैंक MCLR बढ़ा रहे हैं, क्योंकि:

  • MCLR बैंक की अपनी जमा लागत (डिपॉजिट पर दिया जा रहा ब्याज), ऑपरेटिंग कॉस्ट और CRR की लागत से तय होती है, रेपो से सीधे नहीं।
  • कर्ज की मांग बढ़ने पर बैंक जमा खींचने के लिए FD दरें ऊंची रखते हैं, जिससे फंड की लागत बढ़ती है।
  • इसीलिए रेपो-लिंक्ड (EBLR) लोन वालों को रेपो कटौती का फायदा जल्दी मिला, जबकि MCLR वाले ग्राहकों की दरें बैंक-दर-बैंक अलग चल रही हैं।

क्या करें: कर्जदारों के लिए 6 व्यावहारिक कदम

  1. अपना बेंचमार्क चेक करें। अगर लोन MCLR से जुड़ा है और आपकी दर रेपो-लिंक्ड ग्राहकों से काफी ऊंची है, तो बैंक से EBLR पर स्विच करने के बारे में पूछें। ज्यादातर बैंक मामूली कन्वर्जन फीस लेकर यह सुविधा देते हैं।
  2. रीसेट डेट नोट करें। MCLR बदलने का असर अगली रीसेट पर ही दिखेगा। बैंक से लिखित में पूछें कि नई दर कब से लागू होगी।
  3. EMI बनाम अवधि का विकल्प खुद चुनें। दर बढ़ने पर बैंक अक्सर अवधि बढ़ा देते हैं, जिससे कुल ब्याज बहुत बढ़ जाता है। अगर जेब इजाजत दे, तो EMI बढ़वाना बेहतर है।
  4. बैलेंस ट्रांसफर का गणित करें। अगर दूसरा बैंक 0.50% या उससे ज्यादा कम दर दे रहा है और लोन की लंबी अवधि बची है, तो प्रोसेसिंग फीस और स्टांप ड्यूटी जोड़कर हिसाब लगाएं।
  5. छोटा प्रीपेमेंट करें। फ्लोटिंग रेट होम लोन पर बैंक आमतौर पर प्रीपेमेंट पेनल्टी नहीं लेते। साल में एक अतिरिक्त EMI भी कुल ब्याज में अच्छी बचत कराती है।
  6. नया लोन ले रहे हैं तो तुलना करें। फिलहाल SBI और HDFC की 1 साल की MCLR सबसे कम है, लेकिन नए लोन के लिए बैंक की EBLR और स्प्रेड ज्यादा मायने रखते हैं। सिर्फ MCLR देखकर बैंक न चुनें।

आगे क्या उम्मीद करें

RBI की अगली मौद्रिक नीति बैठक अक्टूबर में है। तब तक बैंक अपनी MCLR मासिक समीक्षा में छोटे-छोटे बदलाव करते रहेंगे। त्योहारी सीजन में कर्ज की मांग बढ़ने पर कुछ बैंक डिपॉजिट दरें ऊंची रख सकते हैं, जिसका दबाव MCLR पर बना रह सकता है। इसलिए MCLR वाले ग्राहकों के लिए समझदारी इसी में है कि वे अपने लोन की दर पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर रेपो-लिंक्ड विकल्प पर जाने में देर न करें।

नोट: सभी दरें संबंधित बैंकों की वेबसाइट और 22 अगस्त 2026 तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी पर आधारित हैं। लोन लेने या स्विच करने से पहले बैंक से ताजा दरें और शर्तें जरूर पुष्टि करें।

कवर फोटो: Anupamdutta73 / CC BY-SA 3.0

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