नया इनकम टैक्स एक्ट 2025: 1 अप्रैल 2026 से क्या-क्या बदल गया?

देश का टैक्स कानून 64 साल बाद पूरी तरह बदल गया है। इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह अब इनकम टैक्स एक्ट 2025 ले चुका है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू है। यानी वित्त वर्ष 2026-27 (नए कानून की भाषा में 'टैक्स ईयर 2026-27') से आपकी कमाई पर टैक्स इसी नए कानून के हिसाब से लगेगा।
सरकार का दावा है कि नया कानून सरल भाषा में लिखा गया है — पुराने कानून की 800 से ज्यादा धाराओं को घटाकर करीब 536 धाराओं में समेटा गया है और बेकार हो चुके प्रावधान हटा दिए गए हैं। लेकिन आम टैक्सपेयर के लिए असली सवाल यह है — मेरे लिए क्या बदला? आइए एक-एक करके समझते हैं।
सबसे बड़ा बदलाव: अब सिर्फ 'टैक्स ईयर'
पुराने कानून में दो शब्द थे जो हर साल लोगों को उलझाते थे — Previous Year (वित्त वर्ष) और Assessment Year (आकलन वर्ष)। ITR भरते समय लाखों लोग गलत असेसमेंट ईयर चुन लेते थे।
नए कानून में यह उलझन खत्म कर दी गई है। अब सिर्फ एक शब्द है — टैक्स ईयर (Tax Year)। जिस साल आपने कमाया, उसी साल के नाम से टैक्स और रिटर्न की बात होगी। यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 की कमाई 'टैक्स ईयर 2026-27' की कमाई कहलाएगी — न कोई AY, न कोई PY।
टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं
एक बात साफ कर दें — नए कानून से आपका टैक्स नहीं बढ़ा है। टैक्स स्लैब, रेट और रिबेट पहले जैसे ही हैं। नई रिजीम में सालाना 12 लाख रुपये तक की सामान्य आय पर रिबेट के बाद टैक्स शून्य रहता है। नया कानून टैक्स की रकम नहीं, टैक्स की प्रक्रिया और भाषा बदलता है।
फॉर्म के नंबर बदल गए — Form 16 अब Form 130
दशकों से चले आ रहे फॉर्म नंबरों को नए कानून में नए नंबर मिले हैं। नौकरीपेशा और छोटे कारोबारियों के काम के मुख्य बदलाव:
| पुराना फॉर्म | नया फॉर्म | किस काम आता है |
|---|---|---|
| Form 16 | Form 130 | सैलरी से TDS का सर्टिफिकेट |
| Form 16A | Form 131 | सैलरी के अलावा (FD ब्याज आदि) TDS सर्टिफिकेट |
| Form 26AS | Form 168 | आपके सारे TDS/टैक्स का सालाना स्टेटमेंट |
| Form 12BB | Form 124 | कंपनी को दिया जाने वाला इन्वेस्टमेंट डिक्लेरेशन |
| Form 13 | Form 128 | कम/शून्य TDS कटौती का सर्टिफिकेट लेने की अर्जी |
घबराने की बात नहीं — फॉर्म का काम वही है, सिर्फ नंबर बदला है। लेकिन अगली बार जब कंपनी का HR 'Form 130' मांगे या बैंक 'Form 131' दे, तो चौंकिएगा नहीं।
ITR भरने की तारीखों में राहत
नए कानून के तहत रिटर्न भरने की डेडलाइन में भी बदलाव हुआ है:
- ITR-1 और ITR-2 (नौकरीपेशा, पेंशनर): 31 जुलाई — पहले जैसी
- ITR-3 और ITR-4 (कारोबारी, फ्रीलांसर, प्रोफेशनल): अब 31 अगस्त तक — एक महीने की अतिरिक्त मोहलत
- टैक्स ऑडिट वाले मामले: 31 अक्टूबर — पहले जैसी
रिवाइज्ड रिटर्न अब 31 मार्च तक
पहले अगर रिटर्न में गलती हो जाती थी, तो उसे सुधारने (रिवाइज करने) की आखिरी तारीख 31 दिसंबर होती थी। नए कानून में यह मियाद बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है। ध्यान रहे — 31 दिसंबर के बाद रिवाइज करने पर अतिरिक्त फीस देनी होगी। फिर भी, गलती सुधारने के लिए तीन महीने ज्यादा मिलना बड़ी राहत है।
नौकरीपेशा के लिए बढ़े हुए अलाउंस और पर्क्स
कई छूटें दशकों से उसी पुरानी रकम पर अटकी थीं। नए कानून में इन्हें आज की महंगाई के हिसाब से बढ़ाया गया है:
- बच्चों की पढ़ाई का अलाउंस: 100 रुपये प्रति माह से बढ़कर 3,000 रुपये प्रति माह
- हॉस्टल अलाउंस: 300 रुपये प्रति माह से बढ़कर 9,000 रुपये प्रति माह
- कंपनी से मिले नॉन-कैश गिफ्ट: 5,000 रुपये सालाना की छूट बढ़कर 15,000 रुपये सालाना
- कार लीज पर्क्विजिट की वैल्यूएशन लिमिट भी इंजन साइज के हिसाब से 2-3 गुना बढ़ाई गई है
याद रखें — ये छूटें मुख्य रूप से पुरानी रिजीम चुनने वालों और पर्क्विजिट वैल्यूएशन में काम आती हैं। अपनी सैलरी स्ट्रक्चर के हिसाब से HR या टैक्स सलाहकार से जांच लें कि आपको कौन-सा फायदा मिलेगा।
HRA: अब 8 शहरों में 50% वाली छूट
पुराने नियम में सिर्फ 4 मेट्रो (दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता) में रहने वालों को बेसिक सैलरी के 50% तक HRA छूट मिलती थी; बाकी शहरों में 40%। नए कानून में यह सूची बढ़ाकर 8 शहर कर दी गई है — दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता के साथ अब बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद भी शामिल हैं।
इन चार नए शहरों में किराए पर रहने वाले लाखों IT और सर्विस सेक्टर कर्मचारियों के लिए यह सीधी बचत है — बशर्ते वे पुरानी रिजीम में हों, क्योंकि HRA छूट पुरानी रिजीम में ही मिलती है।
TDS के नियम अब एक जगह
पुराने कानून में TDS के प्रावधान दर्जनों धाराओं (194A, 194C, 194J वगैरह) में बिखरे थे। नए कानून में TDS के सारे नियम एक ही व्यवस्थित चैप्टर में समेट दिए गए हैं। कटौती करने वालों (कंपनियों, बैंकों) के लिए कंप्लायंस आसान होगा, और आम आदमी के लिए यह समझना आसान होगा कि किस पेमेंट पर कितना TDS कटता है।
क्या करें: आम टैक्सपेयर की चेकलिस्ट
- घबराएं नहीं — टैक्स की रकम, स्लैब और रिबेट नहीं बदले हैं। बदली है प्रक्रिया, फॉर्म और भाषा।
- नए फॉर्म नंबर नोट कर लें — Form 16 = Form 130, Form 26AS = Form 168। पुराने नाम धीरे-धीरे चलन से बाहर होंगे।
- ITR-3/ITR-4 भरने वाले याद रखें — अब आपके पास 31 अगस्त तक का समय है, लेकिन आखिरी दिन का इंतजार न करें।
- पुरानी रिजीम वाले बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद के किराएदार अपनी HRA छूट दोबारा कैलकुलेट करें — 40% की जगह 50% का फायदा मिल सकता है।
- कंपनी में इन्वेस्टमेंट डिक्लेरेशन देते समय बढ़े हुए चिल्ड्रन एजुकेशन/हॉस्टल अलाउंस और गिफ्ट लिमिट का ध्यान रखें।
- गलती हो जाए तो रिवाइज्ड रिटर्न की नई डेडलाइन 31 मार्च है — लेकिन 31 दिसंबर के बाद फीस लगेगी, इसलिए जल्दी सुधारें।
- कोई भी बड़ा फैसला (रिजीम चुनना, प्रॉपर्टी बेचना, बड़ा निवेश) करने से पहले अपने CA या टैक्स सलाहकार से नए कानून के हिसाब से सलाह जरूर लें।
नया कानून टैक्स सिस्टम को सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। शुरुआती एक-दो साल नए फॉर्म और नई शब्दावली से थोड़ी अटपटाहट होगी, लेकिन लंबे समय में AY-PY जैसी उलझनों से मुक्ति आम टैक्सपेयर के लिए फायदे का सौदा है।