सुभाष चंद्रा के 22,006.57 करोड़ रुपए के डेट सेटलमेंट को NCLT की मंजूरी, केवल 6.5 करोड़ रुपए के भुगतान का फैसला

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ( NCLT ) ने एसेल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत केवल 6.5 करोड़ रुपए के भुगतान के जरिए लगभग 22,006.57 करोड़ रुपए के डेट का सेटलमेंट किया जाएगा।
इस समझौते की वजह से लेंडर्स को 99.97% का 'हेयरकट' मिलेगा। जुडिशल मेंबर निलेश शर्मा ने इस प्लान को मंजूरी दी है, जिसके बाद से यह मामला चर्चा में है।
- एसेल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा के लगभग 22,006.57 करोड़ रुपए के डेट सेटलमेंट को NCLT की मंजूरी मिली है।
- यह सेटलमेंट केवल 6.5 करोड़ रुपए के भुगतान के जरिए किया जाएगा।
- इस समझौते से लेंडर्स को 99.97% का 'हेयरकट' मिल रहा है।
- जुडिशल मेंबर निलेश शर्मा ने इस प्लान को स्वीकृति दी है।
फैसले पर विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
यह घटनाक्रम 27 अगस्त से 30 अगस्त 2026 के बीच सामने आया, जिसके बाद इस पर भारी सार्वजनिक और राजनीतिक विरोध देखने को मिला। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) समेत कई आलोचकों ने इस फैसले को न्याय का मजाक और बड़े कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में क्लास बायस का उदाहरण बताया है। भगोड़े बिजनेसमेन विजय मिया ने भी इस तरह की भावनाओं को दोहराया है।
सुभाष चंद्रा का पक्ष और ऑडिट की मांग
सुभाष चंद्रा ने अपनी स्थिति का बचाव करते हुए कहा है कि एसेल ग्रुप ने कुल 45,000 करोड़ रुपए के डेट में से लगभग 43,000 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से लोन लेने के बजाय पर्सनल गारंटी दी थी। उन्होंने स्थिति को स्पष्ट करने के लिए एक स्वतंत्र ऑडिट की मांग की है।
लेंडर्स द्वारा कानूनी कदम
इस बीच, LIC हाउसिंग फाइनेंस, केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया समेत इंस्टीट्यूशनल लेंडर्स ने NCLT के इस फैसले को उच्च न्यायालयों में चुनौती देने का निर्णय लिया है। बैंक इस मामले को आगे की अदालतों में लेकर जा रहे हैं।
कॉरपोरेट लोन और रिकवरी से जुड़े आंकड़े
अमीर कॉरपोरेट बॉरोअर्स और सामान्य नागरिकों के बीच डेट रिकवरी में भारी अंतर को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज हो गई है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, बैंकों ने 100 करोड़ रुपए से अधिक के बैड लोन का केवल 15% हिस्सा ही रिकवर किया है, जबकि 1 करोड़ रुपए से कम के लोन के लिए रिकवरी रेट 74% तक पहुंच गया है। इसके अलावा, अगस्त 2026 में संसद में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों से पता चला कि बैंकों ने पिछले 12 वर्षों में कॉरपोरेट डेट में 9.95 लाख करोड़ रुपए राइट-ऑफ किए हैं।
अदालत और रिजर्व बैंक के नियम
मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने कॉरपोरेट लेंडिंग में लापरवाही बरतने और व्यक्तिगत बॉरोअर्स को कठिन तथा अक्सर परेशान करने वाली रिकवरी प्रक्रियाओं से गुजरने के लिए बैंकों की आलोचना की थी। इन तनावों के बीच, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई 2023 में बैंकों से मानवीय प्रथाओं को अपनाने का आग्रह किया था। भारतीय रिजर्व बैंक ( RBI ) 1 अप्रैल 2027 से नए बैंकिंग रेगुलेशन लागू करने जा रहा है, जिसके तहत रिकवरी एजेंटों के गलत आचरण के लिए बैंकों को सीधे जवाबदेह ठहराया जाएगा।