फसल बीमा 2026: आखिरी तारीख बढ़ी, अभी न किया तो नुकसान होगा

देश में खरीफ की बुवाई का सीजन लगभग पूरा हो चुका है, और इसी के साथ किसानों के लिए एक जरूरी खबर सामने आई है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत खरीफ 2026 सीजन के लिए रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख बढ़ा दी है। कई राज्यों में किसान अब भी अपनी फसल का बीमा करा सकते हैं, लेकिन खिड़की जल्द बंद होने वाली है।
अगर आपके घर में कोई खेती-किसानी से जुड़ा है, या आप खुद किसान परिवार से आते हैं, तो यह जानकारी आपके काम की है। एक छोटी सी चूक से पूरे सीजन की मेहनत पर पानी फिर सकता है।

किन राज्यों में डेडलाइन बढ़ी
अलग-अलग राज्यों में रजिस्ट्रेशन की तारीख अलग-अलग रखी गई है। कुछ राज्यों ने पहले ही डेडलाइन 15 अगस्त तक बढ़ा दी थी, जबकि कुछ राज्यों ने इसे और आगे खिसकाया है।
| राज्य | विस्तारित तारीख |
|---|---|
| ओडिशा | 31 अगस्त 2026 |
| राजस्थान | 16 अगस्त 2026 |
| आंध्र प्रदेश (धान किसानों के लिए) | 15 अगस्त 2026 |
| अधिकांश अन्य राज्य | 15 अगस्त 2026 (सामान्य विस्तार) |
ध्यान दें: हर राज्य में तारीख अलग हो सकती है, इसलिए अपने जिले के कृषि विभाग कार्यालय या pmfby.gov.in पर जाकर सही तारीख जरूर जांच लें। कई बार जिला स्तर पर स्थानीय बैंक शाखा भी सही जानकारी दे सकती है।
योजना का फायदा किसे मिलता है
PMFBY के दायरे में तीन तरह के किसान आते हैं:
- लोनी किसान — जिन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) या फसल ऋण लिया है, उनके लिए बीमा लगभग अनिवार्य रूप से बैंक द्वारा कट जाता है
- गैर-लोनी किसान — जिन्होंने कोई कर्ज नहीं लिया, वे स्वेच्छा से बीमा करा सकते हैं
- बटाईदार और किरायेदार किसान — जो खुद जमीन के मालिक नहीं हैं पर खेती करते हैं, वे भी पात्र हैं
जिन किसानों का लोन खाता NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) हो चुका है, उन्हें भी अब गैर-लोनी किसान मानकर बीमा का लाभ दिया जा रहा है।
प्रीमियम कितना देना होता है
यह योजना किसानों पर बहुत ज्यादा बोझ नहीं डालती — बाकी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर भरती हैं।
- खरीफ खाद्य फसलों (धान, मक्का, ज्वार-बाजरा) पर किसान को सिर्फ 2% प्रीमियम
- खरीफ तिलहन फसलों (मूंगफली, सोयाबीन) पर भी 2% प्रीमियम
- कपास, गन्ना जैसी वाणिज्यिक/बागवानी फसलों पर प्रीमियम दर अलग और थोड़ी अधिक होती है
यानी अगर सम इंश्योर्ड (बीमित राशि) 40,000 रुपये प्रति एकड़ है, तो किसान को सिर्फ लगभग 800 रुपये ही जमा करने होते हैं — बाकी सब्सिडी सरकार देती है।
नुकसान होने पर 72 घंटे का नियम याद रखें
यह वह हिस्सा है जिसमें ज्यादातर किसान चूक कर बैठते हैं और बाद में क्लेम नहीं मिल पाता।
- बाढ़, भारी बारिश, ओलावृष्टि, चक्रवात या सूखे से फसल को नुकसान होने पर 72 घंटे के भीतर सूचना देना अनिवार्य है
- सूचना pmfby.gov.in पोर्टल, Crop Insurance App, या संबंधित बीमा कंपनी के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर पर दी जा सकती है
- स्थानीय कृषि अधिकारी या बैंक शाखा को भी लिखित सूचना दी जा सकती है
अगर यह समय-सीमा चूक जाती है, तो क्लेम खारिज होने का खतरा बढ़ जाता है — भले ही नुकसान असली हो।

क्या करें
- अपने राज्य और जिले की सही अंतिम तारीख pmfby.gov.in पर या नजदीकी कृषि कार्यालय से तुरंत कन्फर्म करें
- लोन लिया है तो बैंक से पूछें कि बीमा प्रीमियम कट रहा है या नहीं — कई बार गलती से रह जाता है
- गैर-लोनी किसान हैं तो नजदीकी बैंक, CSC केंद्र या बीमा कंपनी के एजेंट से संपर्क कर तुरंत रजिस्ट्रेशन कराएं
- रजिस्ट्रेशन के बाद मिली पॉलिसी की रसीद और सम इंश्योर्ड की जानकारी संभाल कर रखें
- फसल को नुकसान होने की स्थिति में 72 घंटे के भीतर पोर्टल या ऐप से शिकायत दर्ज करें, देर न करें
- क्लेम को लेकर कोई परेशानी हो तो जिला कृषि अधिकारी या बीमा कंपनी की शिकायत सेल से संपर्क करें
खेती में मौसम का जोखिम हमेशा बना रहता है, लेकिन समय पर उठाया गया एक छोटा कदम — सही तारीख पर रजिस्ट्रेशन और नुकसान होने पर तुरंत सूचना — परिवार की पूरी सीजन की कमाई को सुरक्षित रख सकता है।