आरबीआई 7 लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी को 30 दिन के लिए करेगा लॉक, 7 सितंबर को होगी नीलामी

आरबीआई 7 लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी को 30 दिन के लिए करेगा लॉक, 7 सितंबर को होगी नीलामी

भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने बैंकिंग सिस्टम से 7 लाख करोड़ रुपए तक की रकम को सोखने के लिए 30 दिन के वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो ऑपरेशन की नीलामी 7 सितंबर को आयोजित करने का निर्णय लिया है।

इस हस्तक्षेप का मुख्य उद्देश्य अतिरिक्त इंटरबैंक कैश को 5 प्रतिशत फ्लोर के करीब लाना है, बिना उन फंडों को फंसाए जिनकी बैंकों को शॉर्ट टर्म जरूरतों के लिए आवश्यकता हो सकती है।

  • आरबीआई 7 सितंबर को 30 दिन का वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो ऑपरेशन आयोजित करेगा।
  • इस नीलामी के माध्यम से बैंकिंग सिस्टम से 7 लाख करोड़ रुपए तक की रकम सोखी जाएगी।
  • बैंकों ने 4 सितंबर को दो तीन दिन के ऑपरेशन के दौरान 5.24 प्रतिशत की दर से 6,02,394 करोड़ रुपए सेंट्रल बैंक के पास रखे थे।
  • पात्र बैंक 7 सितंबर को सुबह 9:30 बजे से सुबह 10 बजे तक E Kuber प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी बोलियां जमा करेंगे।
  • इस ऑपरेशन की अवधि 30 दिन है और इसकी निर्धारित रिवर्सल डेट 7 अक्टूबर है।

अतिरिक्त कैश का प्रबंधन और नीलामी के आंकड़े

IllustratedDailyNews.com की रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों ने सामूहिक रूप से 4 सितंबर को दो तीन दिन के ऑपरेशन के दौरान 5.24 प्रतिशत की दर से 6,02,394 करोड़ रुपए सेंट्रल बैंक के पास रखे थे।

ये आंकड़े इस बात को उजागर करते हैं कि रूटीन पेमेंट और सेटलमेंट जरूरतों से परे कितना कैश उपलब्ध रहता है।

सेंट्रल बैंक इस अतिरिक्त कैश को पूरे एक महीने के लिए ओवरनाइट मार्केट से बाहर रखने की अपनी क्षमता का परीक्षण करना चाहता है।

पॉलिसी कॉरिडोर का महत्व

IllustratedDailyNews.com डेस्क की रिपोर्ट के अनुसार, मार्केट रेट अक्सर पॉलिसी कॉरिडोर के फ्लोर से नीचे ट्रेड करते हैं, जिससे मॉनेटरी पॉलिसी का ट्रांसमिशन कमजोर होता है।

जबकि पॉलिसी रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थित है और स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी रेट 5 प्रतिशत पर है, ओवरनाइट सेगमेंट में वेटेड एवरेज रेट 3 सितंबर को गिरकर 4.46 प्रतिशत पर आ गया था।

यह 30 दिन की नीलामी तकनीकी प्लंबिंग के रूप में कार्य करती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मार्केट सेंट्रल बैंक के सिग्नल को अधिक स्पष्ट रूप से सुने।

नीलामी के नियम और भागीदारी

पात्र बैंक E Kuber प्लेटफॉर्म के माध्यम से 7 सितंबर को सुबह 9:30 बजे से सुबह 10 बजे तक अपनी बोलियां जमा करेंगे।

इस ऑपरेशन में 30 दिन का टेनर है जिसकी निर्धारित रिवर्सल डेट 7 अक्टूबर है।

इस वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो प्रोसेस के दौरान बैंक उस ब्याज दर पर प्रतिस्पर्धा करते हैं जिसे वे स्वीकार करने को तैयार हैं।

यदि बैंक पूरी राशि की पेशकश नहीं करते हैं तो सोखी गई कुल राशि 7 लाख करोड़ रुपए की सीमा से नीचे आ सकती है।

एस्केप हैच मैकेनिज्म

प्रतिभागी किसी भी मुंबई वर्किंग डे पर E Kuber प्लेटफॉर्म के जरिए आंशिक या पूर्ण समयपूर्व रिवर्सल का अनुरोध कर सकते हैं।

इन अनुरोधों को मूल मैच्‍योरिटी डेट से कम से कम दो वर्किंग डे पहले जमा किया जाना चाहिए।

यह फीचर 30 दिन के लॉक अप को अचानक टैक्स आउटफ्लो या अप्रत्याशित लोन डिमांड को लेकर चिंतित संस्थानों के लिए एक अटूट वॉल्ट बनने से रोकता है।

इन अनुरोधों के लिए सेटलमेंट अगले वर्किंग डे की शुरुआत में होता है, जो मूलधन के साथ अर्जित ब्याज को वापस करता है।

मैच्‍योरिटी डेट का प्रभाव

IllustratedDailyNews.com रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर की तारीख अगली निर्धारित मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के अंतिम दिन के साथ मेल खाती है।

यह मैच्‍योरिटी शेड्यूल अगली पॉलिसी समीक्षा तक की अवधि को पाटता है जबकि हर दिन शॉर्ट टर्म ऑपरेशन को रोल ओवर करने की आवश्यकता को संभावित रूप से कम करता है।

जबकि आरबीआई ने 3 सितंबर को बकाया ऑपरेशनों से 10.31 लाख करोड़ रुपए की नेट लिक्विडिटी एब्जॉर्प्शन की सूचना दी थी, बैंकिंग सिस्टम में इस कैश का वितरण असमान बना हुआ है।

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