भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस का प्राइवेट बने रहने का आवेदन ठुकराया, अब पब्लिक लिस्टिंग का रास्ता साफ

भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड के उस आवेदन को खारिज कर दिया है जिसमें उसने एक कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की मांग की थी। इस फैसले के बाद अब इस बड़े समूह को रेगुलेशन्स का पालन करते हुए पब्लिक लिस्टिंग की प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ना होगा। द हिंदू, द इंडियन एक्सप्रेस, मिंट, बिजनेस स्टैंडर्ड, सीएनबीसी-टीव्ही18 और द इकोनॉमिक टाइम्स सहित कई समाचार माध्यमों ने रिपोर्ट किया है कि केंद्रीय बैंक ने 11 सितंबर 2026 की तारीख वाला एक औपचारिक पत्र जारी किया है।
यह पत्र समूह के कंपनी सचिव और मुख्य वित्तीय अधिकारी को प्राप्त हुआ था। रिजर्व बैंक के अधिकारियों ने संकेत दिया कि सभी प्रासंगिक कारकों की जांच के बाद इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। टाटा संस को वर्तमान में एक अपर लेयर NBFC के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसकी पुष्टि अगस्त 2026 की सत्रह ऐसे एनबीएफसी की सूची में की गई थी। विनियामक रुख के अनुसार पेंडिंग डीरजिस्ट्रेशन आवेदन से संबंधित पिछली चेतावनियां अब शून्य हो चुकी हैं।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस का रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने का आवेदन ठुकराया।
- केंद्रीय बैंक ने 11 सितंबर 2026 की तारीख वाला औपचारिक पत्र जारी किया।
- टाटा संस वर्तमान में अपर लेयर NBFC के रूप में वर्गीकृत है।
- टाटा संस ने वित्त वर्ष 2024 में 21,813 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया था।
- टाटा संस के लिए मार्च 2026 तक स्टैंडअलोन एसेट्स लगभग 2.01 लाख करोड़ रुपये थे।
- टाटा संस के बोर्ड की बैठक 17 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
विनियमन के रास्ते और बाजार पर प्रभाव
यह कदम उस रास्ते के अंत को चिह्नित करता है जो 2021 में शुरू हुआ था जब केंद्रीय बैंक ने स्केल बेस्ड रेगुलेशन्स की शुरुआत की थी। टाटा संस को सितंबर 2025 तक लिस्टिंग करने की डेडलाइन का सामना करना पड़ा था, लेकिन वित्त वर्ष 2024 में 21,813 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने के बाद उसने छूट मांगी थी। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, जहां शांघवी फाइनेंस समान कर्ज चुकाने के माध्यम से रजिस्टर्ड कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी फ्रेमवर्क से बाहर निकलने में सफल रहा, वहीं टाटा संस को वही परिणाम प्राप्त नहीं हुआ।
अप्रैल 2026 में स्थापित नई परिभाषाओं ने अप्रत्यक्ष सार्वजनिक फंड के दायरे का विस्तार किया ताकि समूह की इकाइयों द्वारा जुटाई गई राशि को शामिल किया जा सके। चूंकि टाटा संस विभिन्न लिस्टेड कंपनियों के शीर्ष पर है जो पब्लिक मार्केट से फंड जुटाती हैं, इसलिए यह नियामक के सीधे निरीक्षण के दायरे में बनी हुई है। मार्च 2026 तक होल्डिंग कंपनी के लिए स्टैंडअलोन एसेट्स लगभग 2.01 लाख करोड़ रुपये रिपोर्ट किए गए थे।
गवर्नेंस संरचना और ट्रस्ट के कानूनी विकल्प
इस फैसले के परिणामस्वरूप समूह के भीतर गवर्नेंस संरचनाओं पर काफी दबाव है। टाटा ट्रस्ट, जिसके पास कंपनी का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा है, मार्केट साइकिल्स और तिमाही डिस्क्लोजर आवश्यकताओं से बचने के लिए एक प्राइवेट स्ट्रक्चर को प्राथमिकता देता है। मिंट के अनुसार, ट्रस्ट द्वारा रिजर्व बैंक के फैसले को लेकर कानूनी चुनौतियों पर विचार किया जा रहा है।
शापूरजी पल्लोजी ग्रुप के पास 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी है और उसने अपनी खुद की लिक्विडिटी की समस्याओं को दूर करने के लिए लंबे समय से लिस्टिंग की वकालत की है। हाल के निवेशक नोटों में इस होल्डिंग का मूल्य लुक-थ्रू आधार पर लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये आंका गया था। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार यह समूह अब अपनी शुरुआती बिक्री योजनाओं का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है।
वित्तीय स्थितियां और आगामी डेडलाइन
अन्य हितधारकों में सात लिस्टेड टाटा कंपनियां शामिल हैं जिनके पास मूल इकाई का कुल 11.92 प्रतिशत हिस्सा है। टाटा केमिकल्स को किसी भी बाजार री-रेटिंग के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है क्योंकि इसका हिस्सा इसके वर्तमान मार्केट कैपिटलाइजेशन से अधिक हो सकता है। चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन पहले ही बोर्ड को सूचित कर चुके हैं कि जब फरवरी 2027 में उनका कार्यकाल समाप्त होगा तो वह पुनर्नियुक्ति नहीं मांगेंगे।
इन विकल्पों पर चर्चा करने के लिए टाटा संस के बोर्ड की बैठक 17 सितंबर 2026 को निर्धारित है। तत्काल चिंताओं में शापूरजी पल्लोजी ग्रुप द्वारा संभावित 3,500 करोड़ रुपये का पुनर्भुगतान शामिल है जिसे इस महीने के अंत तक निपटाया जाना आवश्यक है। भविष्य की कार्रवाई इस बात पर टिकी है कि क्या कंपनी लिस्टिंग के आदेश का पालन करती है या नियामक के खिलाफ कानूनी चुनौती का पीछा करती है।