RBI का जुर्माना: इंडसइंड बैंक और NBFC पर कार्रवाई, कर्जदारों के 5 सबक

RBI का जुर्माना: इंडसइंड बैंक और NBFC पर कार्रवाई, कर्जदारों के 5 सबक

अगस्त 2026 में रिजर्व बैंक ने कर्ज देने वाली संस्थाओं पर कार्रवाई की रफ्तार बनाए रखी है। 14 अगस्त को RBI ने इंडसइंड बैंक और तीन NBFC पर कुल 71.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इससे पहले 3 अगस्त को तीन और NBFC पर कुल 12 लाख रुपये का जुर्माना लगा था। जुलाई में मुथूट फाइनेंस समेत छह NBFC और बैंक ऑफ बड़ौदा पर भी दंड लगाया गया था।

जुर्माने की रकम बैंकों के मुनाफे के सामने मामूली लग सकती है, लेकिन जिन गलतियों के लिए ये जुर्माने लगे हैं, वे सीधे आम कर्जदार से जुड़ी हैं: तय दर से ज्यादा ब्याज वसूलना, KYC रिकॉर्ड समय पर अपलोड न करना, शिकायतों को इंटरनल ओम्बड्समैन तक न पहुंचाना, NPA खातों को गलत तरीके से स्टैंडर्ड दिखाना और क्रेडिट ब्यूरो को लोन की जानकारी न भेजना। इस लेख में समझिए कि हर कार्रवाई के पीछे क्या गड़बड़ी थी, इसका आपके लिए क्या मतलब है, और अपने हक की रक्षा कैसे करें।

लोन स्टेटमेंट पढ़ता ग्राहक
तय दर से ज्यादा ब्याज वसूली जैसी गलतियां पकड़ने के लिए साल में एक बार लोन स्टेटमेंट जरूर मिलाएं। (फोटो: Anupamdutta73 / CC BY-SA 3.0)

14 अगस्त 2026: इंडसइंड बैंक और तीन NBFC पर 71.20 लाख का जुर्माना

संस्था जुर्माना किस नियम का उल्लंघन
इंडसइंड बैंक 59.20 लाख रुपये जमा पर ब्याज दर और स्टैंडर्ड एसेट्स के सिक्योरिटाइजेशन से जुड़े निर्देश
नॉर्दर्न आर्क कैपिटल 6.20 लाख रुपये वित्तीय विवरणों में खुलासा और इंटरनल ओम्बड्समैन के नियम
मुथूट एमक्रेड (पहले मुथूट्टू मिनी फाइनेंसर्स) 3.10 लाख रुपये एसेट क्लासिफिकेशन के नियम
फ्यूजन फाइनेंस 2.70 लाख रुपये KYC निर्देश

इंडसइंड बैंक पर सबसे बड़ा जुर्माना लगा। RBI की जांच (31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति के आधार पर) में पाया गया कि बैंक ने कुछ करंट अकाउंट में जमा पर ब्याज दिया, जिसकी अनुमति नहीं है, और "सिंथेटिक सिक्योरिटाइजेशन" जैसी गतिविधि की, जो स्टैंडर्ड एसेट्स के सिक्योरिटाइजेशन निर्देशों के खिलाफ है। यह मामला मुख्य रूप से बैंक के अंदरूनी कामकाज से जुड़ा है, खुदरा कर्जदारों से इसका सीधा संबंध नहीं।

नॉर्दर्न आर्क कैपिटल का मामला ग्राहकों के लिए ज्यादा अहम है। RBI ने पाया कि कंपनी ने 2024-25 के वित्तीय विवरणों में ग्राहक शिकायतों की सही जानकारी नहीं दी और जिन शिकायतों को आंशिक या पूरी तरह खारिज किया गया, उन्हें अपने-आप इंटरनल ओम्बड्समैन के पास नहीं भेजा। नियम के मुताबिक खारिज की गई हर शिकायत इंटरनल ओम्बड्समैन के पास जानी चाहिए।

मुथूट एमक्रेड ने कुछ NPA खातों को बिना पूरा बकाया मूलधन और ब्याज वसूले "स्टैंडर्ड" दिखा दिया। यह एसेट क्लासिफिकेशन नियमों का उल्लंघन है।

फ्यूजन फाइनेंस ने ग्राहकों के खातों की जोखिम श्रेणी (रिस्क कैटेगराइजेशन) की समय-समय पर समीक्षा की व्यवस्था नहीं बनाई। KYC नियमों के तहत यह समीक्षा कम से कम हर छह महीने में होनी चाहिए।

3 अगस्त 2026: तीन NBFC पर 12 लाख का जुर्माना

  • इन्फिनिटी फिनकॉर्प सॉल्यूशंस: 5.40 लाख रुपये। रिस्क कैटेगराइजेशन की समीक्षा नहीं की, और लोन आवेदन फॉर्म व सैंक्शन लेटर में जोखिम के आधार पर ब्याज दर तय करने का तरीका नहीं बताया। यह फेयर प्रैक्टिस कोड का उल्लंघन है।
  • नामदेव फिनवेस्ट: 2.70 लाख रुपये। संदिग्ध लेनदेन की पहचान और रिपोर्टिंग के लिए मजबूत सॉफ्टवेयर नहीं था।
  • उत्सव सिक्योरिटीज: 3.90 लाख रुपये। प्रमुख प्रबंधकीय कर्मचारी दूसरी मिडिल-लेयर NBFC में भी पद पर थे, और कुछ लोन खातों की जानकारी क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियों (क्रेडिट ब्यूरो) को नहीं भेजी गई।

जुलाई की कार्रवाई जो अब भी चर्चा में है

  • बैंक ऑफ बड़ौदा पर 63.60 लाख रुपये: RBI ने पाया कि बैंक ने कुछ लोन खातों में तय दर से ज्यादा ब्याज वसूला और कुछ ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड समय पर सेंट्रल KYC रजिस्ट्री (CKYCR) पर अपलोड नहीं किए। साथ ही GIC हाउसिंग फाइनेंस पर 3.10 लाख रुपये का जुर्माना लगा।
  • मुथूट फाइनेंस (5.80 लाख), अवेल फाइनेंशियल सर्विसेज (6.20 लाख), सत्या माइक्रोकैपिटल (3.10 लाख), धानी लोन्स (2.70 लाख) समेत छह NBFC पर 18 जुलाई को जुर्माना लगा। सत्या माइक्रोकैपिटल ने रीस्ट्रक्चर्ड लोन को NPA के रूप में वर्गीकृत नहीं किया था।
बैंक काउंटर पर शिकायत फॉर्म
खारिज की गई शिकायत इंटरनल ओम्बड्समैन तक पहुंचनी चाहिए; न पहुंचे तो RBI ओम्बड्समैन का रास्ता खुला है। (फोटो: Gppande / CC BY-SA 3.0)

इन गलतियों का आपसे क्या लेना-देना है?

RBI हर बार साफ करता है कि जुर्माना नियामकीय कमियों के लिए है और इससे संस्था और ग्राहक के बीच हुए किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता। यानी आपका लोन या जमा सुरक्षित है। लेकिन इन कार्रवाइयों से पता चलता है कि किन जगहों पर कर्जदारों को सतर्क रहना चाहिए:

1. तय दर से ज्यादा ब्याज वसूली

बैंक ऑफ बड़ौदा के मामले में यही हुआ। अगर आपका सैंक्शन लेटर 8.50% कहता है और स्टेटमेंट में ब्याज किसी और दर से लग रहा है, तो यह गलती हो सकती है। RBI के फेयर प्रैक्टिस कोड के तहत बैंक को ब्याज दर, रीसेट और शुल्क पारदर्शी तरीके से बताने होते हैं।

2. KYC की समीक्षा और CKYC अपलोड

रिस्क कैटेगराइजेशन की समीक्षा न होने का मतलब है कि कम जोखिम वाले ग्राहकों से भी बार-बार दस्तावेज मांगे जा सकते हैं या उच्च जोखिम वाले खातों की निगरानी नहीं होती। CKYCR पर रिकॉर्ड न होने से दूसरी जगह लोन या खाता खोलते समय आपको फिर से पूरी KYC करानी पड़ती है।

3. शिकायत का इंटरनल ओम्बड्समैन तक न पहुंचना

नियम यह है कि अगर बैंक या NBFC आपकी शिकायत पूरी या आंशिक रूप से खारिज करता है, तो उसे अपने-आप इंटरनल ओम्बड्समैन के पास भेजना होगा, और जवाब में आपको यह बताना होगा कि मामला IO ने देखा है। अगर आपको सिर्फ "शिकायत बंद" का संदेश मिला और IO का जिक्र नहीं, तो आप सवाल उठा सकते हैं।

4. NPA को गलत तरीके से स्टैंडर्ड दिखाना

यह कर्जदार के लिए उल्टा भी पड़ सकता है। अगर खाता असल में NPA है और बैंक उसे स्टैंडर्ड दिखा रहा है, तो आपको अपनी वास्तविक स्थिति, सेटलमेंट विकल्प या रीस्ट्रक्चरिंग की जानकारी नहीं मिलती। वहीं गलत रिपोर्टिंग का असर आगे चलकर क्रेडिट रिपोर्ट पर दिख सकता है।

5. क्रेडिट ब्यूरो को जानकारी न भेजना

उत्सव सिक्योरिटीज और पहले सिटी यूनियन बैंक के मामलों में यह कमी पाई गई। अगर आपका लोन ब्यूरो में दर्ज ही नहीं है, तो समय पर EMI चुकाने का फायदा आपके स्कोर में नहीं दिखेगा। और अगर बंद हो चुका लोन "एक्टिव" दिख रहा है, तो नए लोन में दिक्कत आ सकती है।

क्या करें: कर्जदारों के लिए चेकलिस्ट

  1. साल में एक बार लोन स्टेटमेंट का ब्याज मिलाएं। सैंक्शन लेटर की दर, रीसेट की तारीख और स्टेटमेंट में लगे ब्याज की तुलना करें। गड़बड़ी दिखे तो लिखित शिकायत करें और रिफंड मांगें।
  2. CKYC नंबर जांचें। बैंक से अपना CKYC आइडेंटिफायर (14 अंकों का KIN) पूछें। अगर नहीं है, तो अपलोड करवाने को कहें, इससे भविष्य में KYC दोहराने से बचेंगे।
  3. शिकायत का रिकॉर्ड रखें। हर शिकायत का नंबर और तारीख नोट करें। 30 दिन में संतोषजनक जवाब न मिले, या जवाब से संतुष्ट न हों, तो RBI के CMS पोर्टल (cms.rbi.org.in) या 14448 पर RBI ओम्बड्समैन से शिकायत करें।
  4. क्रेडिट रिपोर्ट हर तिमाही देखें। सभी ब्यूरो से साल में एक मुफ्त रिपोर्ट मिलती है। बंद लोन एक्टिव दिखे, या चालू लोन गायब हो, तो ब्यूरो और लेंडर दोनों को डिस्प्यूट दर्ज कराएं।
  5. NBFC से लोन लेते समय RBI रजिस्ट्रेशन देखें। RBI की वेबसाइट पर रजिस्टर्ड NBFC की सूची है। साथ ही सैंक्शन लेटर में ब्याज दर, सालाना प्रतिशत दर (APR), सभी शुल्क और रिकवरी एजेंट की नीति लिखी होनी चाहिए।
  6. जुर्माने की खबर से घबराएं नहीं, सवाल पूछें। अगर आपके लेंडर पर जुर्माना लगा है, तो उससे पूछें कि जिस कमी के लिए दंड लगा, उसे ठीक करने के लिए क्या किया गया है और क्या आपके खाते पर उसका कोई असर है।

बड़ी तस्वीर: RBI की निगरानी क्यों बढ़ रही है

2026 में RBI ने NBFC के लिए स्केल-बेस्ड रेगुलेशन को और कसा है और 1 जुलाई 2026 से लागू संशोधित निर्देशों में NBFC की नई श्रेणियां बनाई हैं। साथ ही एकीकृत ओम्बड्समैन योजना में मुआवजे की सीमा बढ़ाई गई है। छोटे-छोटे जुर्माने असल में संदेश हैं कि KYC, फेयर प्रैक्टिस, शिकायत निवारण और सही रिपोर्टिंग पर कोई ढील नहीं चलेगी। कर्जदार के तौर पर आपका काम है कि इन नियमों को जानें और अपने खाते पर उनका पालन सुनिश्चित करें।

नोट: जुर्माने की रकम और कारण RBI की प्रेस विज्ञप्तियों और 22 अगस्त 2026 तक की सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित हैं। यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, किसी संस्था के खिलाफ राय नहीं।

कवर फोटो: Sailko / CC BY 3.0

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