₹12 लाख तक टैक्स ज़ीरो, फिर भी बचत के ये 5 तरीके क्यों ज़रूरी हैं?

₹12 लाख तक टैक्स ज़ीरो, फिर भी बचत के ये 5 तरीके क्यों ज़रूरी हैं?

"अब तो ₹12 लाख तक टैक्स ही नहीं लगता, फिर PPF और LIC में पैसा क्यों डालूं?" — यह सवाल आजकल हर घर में पूछा जा रहा है। जवाब उतना सीधा नहीं है जितना लगता है।

वित्त वर्ष 2025-26 (AY 2026-27) से नई टैक्स व्यवस्था वाकई बहुत उदार हो गई है। लेकिन टैक्स बचाना और भविष्य के लिए बचत करना — ये दो अलग चीज़ें हैं। आइए पूरा गणित समझते हैं।

नई टैक्स व्यवस्था: क्या-क्या बदला?

बजट 2025 के बाद नई व्यवस्था (जो अब डिफॉल्ट है) में:

  • बेसिक छूट सीमा: ₹4 लाख (पहले ₹3 लाख थी)
  • धारा 87A रिबेट: ₹60,000 तक — यानी ₹12 लाख तक की सामान्य आय पर टैक्स शून्य
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन: सैलरीड और पेंशनर्स के लिए ₹75,000
  • नतीजा: ₹12.75 लाख तक की सैलरी पूरी तरह टैक्स-फ्री

पुरानी व्यवस्था में रिबेट अब भी सिर्फ ₹12,500 (₹5 लाख तक की आय पर) है, लेकिन वहां 80C, 80D, होम लोन ब्याज जैसी दर्जनों कटौतियां मिलती हैं।

नई बनाम पुरानी: किसके लिए क्या सही?

स्थिति बेहतर विकल्प
सैलरी ₹12.75 लाख तक, कम निवेश नई व्यवस्था (टैक्स शून्य)
होम लोन + 80C + 80D + HRA सब क्लेम करते हैं पुरानी व्यवस्था की गणना ज़रूर करें
किराए के घर में, HRA बड़ा है पुरानी व्यवस्था फायदेमंद हो सकती है
निवेश की आदत नहीं, सादी सैलरी नई व्यवस्था

मोटा नियम: अगर आपकी कुल कटौतियां (80C + 80D + होम लोन ब्याज + HRA वगैरह) आय का बड़ा हिस्सा हैं, तभी पुरानी व्यवस्था जीतती है। ज़्यादातर मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अब नई व्यवस्था ही बेहतर बैठ रही है। फिर भी फाइल करने से पहले पोर्टल के टैक्स कैलकुलेटर से दोनों की तुलना ज़रूर करें।

तो क्या 80C और NPS बेकार हो गए?

बिल्कुल नहीं। तीन वजहें:

1. बचत की आदत टैक्स से बड़ी है। PPF आज भी करीब 7.1% टैक्स-फ्री रिटर्न देता है, सुकन्या समृद्धि 8.2%। टैक्स छूट मिले या न मिले, ये सुरक्षित, सरकारी गारंटी वाले साधन हैं।

2. पुरानी व्यवस्था वालों के लिए सब कुछ पहले जैसा। 80C में ₹1.5 लाख (PPF, ELSS, LIC, बच्चों की ट्यूशन फीस, होम लोन प्रिंसिपल), 80D में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम, और NPS में 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त ₹50,000 की कटौती — ये सब लागू हैं।

3. NPS का एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन नई व्यवस्था में भी टैक्स-फ्री। धारा 80CCD(2) के तहत एम्प्लॉयर का NPS योगदान (बेसिक सैलरी का 14% तक) नई व्यवस्था में भी कटौती योग्य है। सैलरीड लोगों के लिए यह नई व्यवस्था का सबसे बड़ा छिपा हुआ फायदा है — अपने HR से सैलरी स्ट्रक्चर में NPS जुड़वाने की बात करें।

एक उदाहरण से समझिए: राहुल की ₹14 लाख की सैलरी

मान लीजिए राहुल की सालाना सैलरी ₹14 लाख है। नई व्यवस्था में ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद टैक्सेबल आय ₹13.25 लाख बनती है — यह ₹12 लाख की रिबेट सीमा से ऊपर है, इसलिए स्लैब के हिसाब से टैक्स बनेगा (बजट 2025 के स्लैब: ₹4 लाख तक शून्य, फिर 4-8 लाख पर 5%, 8-12 लाख पर 10%, 12-16 लाख पर 15%)। मोटे तौर पर करीब ₹78,750 टैक्स + सेस।

अब अगर राहुल पुरानी व्यवस्था चुने और उसके पास 80C में ₹1.5 लाख, NPS में ₹50,000, हेल्थ इंश्योरेंस में ₹25,000 और होम लोन ब्याज ₹2 लाख हो — तब कुल कटौतियां ₹4.75 लाख के आसपास पहुंचती हैं और पुरानी व्यवस्था टक्कर में आ जाती है। सबक साफ है: आपकी असली कटौतियों के बिना कोई भी जवाब सबके लिए सही नहीं है — गणना करके ही रिजीम चुनें।

बचत के भरोसेमंद साधन: एक नज़र में

साधन मौजूदा रिटर्न (लगभग) खासियत
PPF 7.1% टैक्स-फ्री 15 साल लॉक-इन, सरकारी गारंटी
सुकन्या समृद्धि 8.2% टैक्स-फ्री बेटी के नाम, सबसे ऊंची छोटी-बचत दर
सीनियर सिटिज़न सेविंग्स (SCSS) 8.2% 60+ के लिए, तिमाही ब्याज
ELSS म्यूचुअल फंड बाज़ार आधारित सिर्फ 3 साल लॉक-इन, लंबी अवधि में बेहतर संभावना
NPS बाज़ार आधारित रिटायरमेंट फंड, 80CCD(2) नई व्यवस्था में भी

(छोटी बचत योजनाओं की दरें सरकार हर तिमाही तय करती है — निवेश से पहले ताज़ा दर ज़रूर देख लें।)

TDS के नए नियम: सीनियर सिटिज़न्स और किराएदारों को राहत

बजट 2025 से TDS की सीमाएं भी काफी बढ़ी हैं, जो FY 2025-26 से लागू हैं:

  • FD ब्याज (सीनियर सिटिज़न): TDS की सीमा ₹50,000 से बढ़कर ₹1 लाख सालाना — यानी बैंक अब ₹1 लाख तक के ब्याज पर TDS नहीं काटेगा
  • किराया (धारा 194-I): सीमा ₹2.4 लाख से बढ़कर ₹6 लाख सालाना — यानी ₹50,000 महीने तक के किराए पर TDS का झंझट खत्म
  • प्रोफेशनल फीस: ₹30,000 से बढ़कर ₹50,000
  • ब्रोकरेज/कमीशन: ₹15,000 से बढ़कर ₹20,000

ध्यान रहे — TDS न कटने का मतलब टैक्स माफ होना नहीं है। आय टैक्सेबल है तो रिटर्न में दिखानी ही होगी। हां, अगर आपकी कुल आय टैक्स सीमा से कम है, तो बैंक में फॉर्म 15G (सीनियर सिटिज़न के लिए 15H) जमा करके TDS कटने से पहले ही रोक सकते हैं।

GST 2.0: दुकान से भी हो रही है बचत

टैक्स बचत सिर्फ ITR में नहीं होती। 22 सितंबर 2025 से लागू GST 2.0 में 12% और 28% के स्लैब खत्म कर दिए गए — अब मुख्य दरें सिर्फ 5% और 18% हैं। रोज़मर्रा की कई चीज़ें जो पहले 12% पर थीं, अब 5% पर आ गई हैं, और 28% वाली कई वस्तुएं 18% पर। सिर्फ तंबाकू, पान मसाला जैसी चीज़ों पर 40% की नई दर है।

एक आम परिवार के मासिक बजट में इसका सीधा असर दिखता है — किराना, दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स कई श्रेणियों में सस्ते हुए हैं। यानी सरकार ने इनकम टैक्स और GST — दोनों तरफ से मध्यम वर्ग की जेब में पैसा छोड़ा है। समझदारी इसमें है कि यह बचा हुआ पैसा खर्च में न उड़े, निवेश में जाए।

बचत को 'ऑटोमैटिक' बनाइए

टैक्स छूट का लालच हटते ही सबसे बड़ा खतरा यह है कि लोग बचत ही बंद कर देंगे। इसका इलाज है ऑटोमेशन — सैलरी आते ही पहले हफ्ते में SIP और PPF की किस्त अपने-आप कट जाए, ऐसा स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन बैंक में सेट कर दें। नियम सीधा है: पहले बचत, फिर खर्च। महीने के अंत में जो बचे उसे निवेश करने की योजना कभी सफल नहीं होती। नई व्यवस्था से जो टैक्स बचा है (कई परिवारों के लिए सालाना ₹50,000-₹1 लाख तक), उतनी ही रकम की एक अलग SIP शुरू कर दें — दस साल में यही रकम आपका सबसे बड़ा फंड बन सकती है।

क्या करें: 5 कदम की बचत योजना

  • 1. दोनों रिजीम की गणना करें: incometax.gov.in के कैलकुलेटर पर अपनी असली कटौतियां डालकर देखें — अंदाज़े से रिजीम न चुनें
  • 2. बचत जारी रखें: टैक्स छूट न भी मिले, PPF/सुकन्या/ELSS में नियमित निवेश बंद न करें — यही रिटायरमेंट और बच्चों की पढ़ाई का फंड है
  • 3. NPS 80CCD(2) का फायदा लें: एम्प्लॉयर से सैलरी में NPS योगदान जुड़वाएं — नई व्यवस्था में भी टैक्स बचेगा
  • 4. सीनियर सिटिज़न घर के बुज़ुर्गों को बताएं: FD ब्याज ₹1 लाख तक TDS-फ्री है; ज़रूरत हो तो फॉर्म 15H भरवाएं
  • 5. हेल्थ इंश्योरेंस को टैक्स से न जोड़ें: 80D मिले या न मिले, बीमा परिवार की सुरक्षा के लिए ज़रूरी है

टैक्स व्यवस्था बदल गई है, लेकिन पैसे का पुराना नियम वही है — जो बचाता है, वही आगे बढ़ता है। नई व्यवस्था ने आपके हाथ में ज़्यादा पैसा छोड़ा है; अब उसे सही जगह लगाने की ज़िम्मेदारी आपकी है।

(यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश या टैक्स सलाह नहीं। निर्णय से पहले विशेषज्ञ से परामर्श करें।)

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