किराए और प्रोफेशनल फीस पर TDS के नए नियम: फॉर्म 16A अब फॉर्म 131

किराए और प्रोफेशनल फीस पर TDS के नए नियम: फॉर्म 16A अब फॉर्म 131

अगर आप किराए पर मकान देते हैं, या डॉक्टर, वकील, सीए, कंसल्टेंट जैसे किसी प्रोफेशन से जुड़े हैं, तो आपके लिए एक ज़रूरी अपडेट है। 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 ने TDS (Tax Deducted at Source) से जुड़े कई नियमों को बदल दिया है — सेक्शन नंबर बदले हैं, सीमाएं बढ़ी हैं, और वो फॉर्म भी बदल गया है जो अब तक हर सैलरी न लेने वाले टैक्सपेयर की जेब में होता था।

यह बदलाव पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह लाए गए नए कानून का हिस्सा है, और टैक्स ईयर 2026 (यानी असेसमेंट ईयर 2027-28 से जुड़ी अवधि) से पूरी तरह लागू है। आइए समझते हैं कि आम टैक्सपेयर के लिए इसका क्या मतलब है।

किराए पर TDS: सीमा में बड़ा बदलाव

पुराने एक्ट में सेक्शन 194I के तहत अगर सालाना किराया ₹2,40,000 से ज़्यादा होता था, तो किराया देने वाला (आमतौर पर कोई कंपनी या बिज़नेस) टैक्स काटकर ही किराया देता था। नए एक्ट में यह सीमा बढ़ा दी गई है।

  • नई सालाना सीमा: ₹6,00,000 (यानी करीब ₹50,000 प्रति माह)
  • दरें पहले जैसी: ज़मीन, बिल्डिंग या फर्नीचर के किराए पर 10%, प्लांट व मशीनरी के किराए पर 2%

यानी अगर आपका मासिक किराया ₹50,000 से कम है, तो अब कंपनी या बिज़नेस किराएदार को TDS काटने की ज़रूरत ही नहीं है।

एक और राहत की बात व्यक्तिगत किराएदारों (individuals/HUF, जो टैक्स ऑडिट के दायरे में नहीं आते) के लिए है। सेक्शन 194IB के तहत जब कोई व्यक्ति ₹50,000 प्रति माह से ज़्यादा किराया देता है तो उसे भी TDS काटना पड़ता है — इसकी दर 5% से घटाकर अब 2% कर दी गई है। इससे किराएदारों पर टैक्स काटने का बोझ कम हुआ है।

प्रोफेशनल फीस पर TDS: सेक्शन 194J की जगह सेक्शन 393

पुराने एक्ट का सेक्शन 194J, जो डॉक्टर, वकील, आर्किटेक्ट, कंसल्टेंट और तकनीकी सेवाओं की फीस पर TDS तय करता था, अब नए एक्ट में सेक्शन 393 बन गया है।

बिंदु पुराना नियम नया नियम (2026)
सालाना सीमा ₹30,000 ₹50,000
प्रोफेशनल सर्विस दर 10% 10% (अपरिवर्तित)
टेक्निकल सर्विस दर 2% 2% (अपरिवर्तित)
डायरेक्टर रेम्यूनरेशन पहले रुपये से पहले रुपये से (कोई सीमा नहीं)

यानी अगर किसी वकील, सीए या कंसल्टेंट को साल भर में ₹50,000 से कम फीस मिलती है, तो क्लाइंट को अब TDS काटने की ज़रूरत नहीं। पहले यह सीमा सिर्फ ₹30,000 थी, यानी सीमा में करीब 67% की बढ़ोतरी हुई है — छोटे और नए फ्रीलांस प्रोफेशनल्स के लिए यह राहत की बात है।

ध्यान रहे, TDS सिर्फ सर्विस की मूल फीस पर कटता है, GST वाले हिस्से पर नहीं।

PAN न होने पर या रिटर्न न भरने पर सख्ती बरकरार

नए एक्ट में भी पुराने प्रावधान जस के तस हैं:

  • अगर पेमेंट पाने वाले के पास PAN नहीं है, तो 20% की दर से TDS कटेगा, चाहे रकम कितनी भी कम क्यों न हो।
  • जो लोग समय पर ITR फाइल नहीं करते (specified persons), उन पर सामान्य दर से दोगुनी या 5%, जो भी ज़्यादा हो — उस दर से TDS काटा जा सकता है।

फॉर्म 16A अब फॉर्म 131 — क्या बदला

सबसे बड़ा व्यावहारिक बदलाव फॉर्म के नाम और नंबर का है। सालों से सैलरी के अलावा होने वाली आमदनी — जैसे किराया, कमीशन, प्रोफेशनल फीस, ब्याज, डिविडेंड — पर TDS सर्टिफिकेट के तौर पर फॉर्म 16A मिलता था। नए एक्ट में इसे फॉर्म 131 नाम दिया गया है।

  • फॉर्म 131 भी तिमाही आधार पर जारी होता है, ठीक वैसे ही जैसे फॉर्म 16A जारी होता था।
  • इसमें एक नया फील्ड जोड़ा गया है — पेमेंट कोड (1001 से 1092 के बीच का एक नंबर), जो यह बताता है कि पेमेंट किस तरह की है (किराया, फीस, कमीशन आदि)। यह कोड TDS क्रेडिट मिलाने और रिटर्न भरने में मदद करेगा।
  • TDS की तिमाही रिटर्न फाइल करने वाला फॉर्म (पुराना फॉर्म 26Q) अब फॉर्म 140 कहलाएगा।

सैलरी वाले फॉर्म 16 का नाम भी बदलकर फॉर्म 130 हो गया है।

किसे TDS काटना ज़रूरी है

नए एक्ट में भी यह साफ है कि हर कोई किराया देने वाला या फीस देने वाला TDS काटने के लिए बाध्य नहीं है। TDS काटना इनके लिए अनिवार्य है:

  • सभी कंपनियां
  • पार्टनरशिप फर्म और LLP
  • वे व्यक्ति/HUF जिनका बिज़नेस टर्नओवर ₹1 करोड़ से ज़्यादा है, या प्रोफेशनल रिसीट्स ₹50 लाख से ज़्यादा हैं

यानी अगर आप एक आम व्यक्ति हैं और किसी प्रोफेशनल को छोटी-मोटी फीस देते हैं, तो यह नियम आप पर लागू नहीं होता — सिवाय ऊपर बताई गई ₹50,000 प्रति माह किराए वाली सेक्शन 194IB स्थिति के।

क्या करें

  • मकान मालिक हैं तो: अगर आपका किराएदार कोई कंपनी/बिज़नेस है और मासिक किराया ₹50,000 से कम है, तो अब TDS नहीं कटेगा — पूरा किराया खाते में आएगा। अपने किराएदार से इस बदलाव की पुष्टि कर लें।
  • प्रोफेशनल/फ्रीलांसर हैं तो: साल भर की अपनी फीस पर नज़र रखें। ₹50,000 से नीचे रहने पर TDS नहीं कटेगा, लेकिन इनकम अभी भी टैक्सेबल रहेगी — ITR में दिखानी ज़रूरी है।
  • PAN अपडेट रखें: PAN न होने पर 20% की भारी दर से TDS कटता रहेगा, इसलिए सभी क्लाइंट्स के पास सही PAN जमा कराएं।
  • फॉर्म 131 मांगें, फॉर्म 16A नहीं: टैक्स ईयर 2026 से क्लाइंट/डिडक्टर से अब फॉर्म 131 मांगें, यह आपके TDS क्रेडिट के दावे का सबूत है।
  • 26AS/AIS से मिलान करें: रिटर्न भरने से पहले फॉर्म 131 में दिखी रकम को अपने 26AS और AIS स्टेटमेंट से ज़रूर मिलाएं, ताकि क्रेडिट क्लेम करने में दिक्कत न हो।

नए एक्ट का मकसद टैक्स सिस्टम को सरल बनाना है, लेकिन सेक्शन नंबर और फॉर्म नाम बदलने से शुरुआत में कन्फ्यूज़न हो सकता है। इसलिए अगली बार जब कोई किराया या फीस से जुड़ा टैक्स सर्टिफिकेट मिले, तो नाम देखकर हैरान न हों — यह वही पुराना फॉर्म 16A है, बस नए नाम फॉर्म 131 के साथ।

कवर फोटो: Wikimedia Commons / GODL-India

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