बिजनेस रिपोर्ट: सावन में चमका हरियाणा का ‘फिरनी बाजार’, इस सीजन ₹1.25 करोड़ से अधिक के टर्नओवर का अनुमान
कैथल (पूंडरी), 12 जुलाई 2026 | जनता आवाज़ (Corporate Bureau)
भारत के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में पारंपरिक और मौसमी व्यवसायों (Seasonal Businesses) का भारतीय अर्थव्यवस्था में कितना बड़ा योगदान है, इसका सटीक उदाहरण इन दिनों हरियाणा के कैथल जिले का पूंडरी कस्बा पेश कर रहा है। सावन का महीना शुरू होते ही यहाँ का पारंपरिक ‘फिरनी उद्योग’ (Phirni Industry) रिकॉर्ड तोड़ कमाई की राह पर है। इस साल स्थानीय बाजार को करोड़ों रुपये के बिजनेस की उम्मीद है।

सावन में चमका हरियाणा का ‘फिरनी बाजार’, इस सीजन ₹1.25 करोड़ से अधिक के टर्नओवर का अनुमान
मांग में 40% का उछाल, 700 क्विंटल बिक्री का टारगेट
आमतौर पर पूंडरी का फिरनी उद्योग हर साल औसतन 500 क्विंटल मिठाई का कारोबार करता है। लेकिन इस वर्ष मार्केट सेंटीमेंट और बढ़ती मांग को देखते हुए कारोबारी इस सीजन में 700 क्विंटल का आंकड़ा छूने की उम्मीद जता रहे हैं।
मशहूर कारोबारी कृष्ण सैनी हलवाई के अनुसार, इस साल बाजार में फिरनी की कीमत ₹200 से ₹300 प्रति किलोग्राम के बीच बनी हुई है। मांग में आए इस 40% के उछाल के चलते इस सीजन में कुल टर्नओवर 1 से सवा करोड़ रुपये के पार जाने का अनुमान है, जो स्थानीय सूक्ष्म और लघु उद्यमियों (MSMEs) के लिए एक बड़ा बूस्ट है।
बाबैन अनाजमंडी में सूरजमुखी की रिकॉर्ड आवक, 27,206 क्विंटल पहुंची फसल
‘लोकल से ग्लोबल’ हुई फिरनी: सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स का मिला सहारा
पारंपरिक रूप से चलने वाले इस बिजनेस को अब डिजिटल इकॉनमी का पूरा सपोर्ट मिल रहा है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फूड ब्लॉगर्स के जरिए सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे रील्स ने इस लोकल ब्रांड को नेशनल और इंटरनेशनल रीच दी है।
डिजिटल बुकिंग और लॉजिस्टिक्स की सुविधा के कारण अब दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और राजस्थान के थोक व्यापारी सीधे ऑर्डर प्लेस कर रहे हैं। इतना ही नहीं, विदेशों (जैसे कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूके) में रहने वाले एनआरआई (NRI) ग्राहक भी डिजिटल पेमेंट गेटवे के जरिए अपने परिवारों के लिए प्रीमियम बुकिंग करवा रहे हैं, जिससे इस पारंपरिक मिठाई उद्योग का कमर्शियल दायरा कई गुना बढ़ गया है।

90 साल पुराना बिजनेस मॉडल, ‘फीकी फिरनी’ का इन्वेंट्री मैनेजमेंट
फाइनेंशियल और मैन्युफैक्चरिंग मैनेजमेंट के लिहाज से भी यह उद्योग बेहद दिलचस्प है। इस व्यवसाय से जुड़े कारीगरों ने बताया कि लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को सुचारू रखने के लिए वे ‘फीकी फिरनी’ (बिना चाशनी वाली) का उत्पादन एक महीने पहले ही शुरू कर देते हैं।
इसकी ‘शेल्फ लाइफ’ (Shelf Life) एक महीने की होती है, जिसके कारण इन्वेंट्री खराब होने का जोखिम (Risk of Spoilage) शून्य हो जाता है। जैसे-जैसे थोक और रिटेल के ऑर्डर (JIT – Just-In-Time Model के तहत) आते हैं, इस पर चाशनी चढ़ाकर बाजार में लिक्विडेट (बेच) कर दिया जाता है।
भारत में सोना न खरीदें, पेट्रोल बचाएं ,देश को मजबूत बनाने में सहयोग दे
बदलते मार्केट ट्रेंड्स: ‘शुगर-फ्री’ और प्रीमियम घेवर की ओर झुकाव
उपभोक्ताओं की बदलती आदतों (Changing Consumer Behavior) को देखते हुए अब यह बाजार खुद को अपग्रेड कर रहा है।
हेल्थ कॉन्शियस सेगमेंट: वैल्यू एडिशन के तौर पर अब ‘शुगर-फ्री फिरनी’ का उत्पादन बढ़ाया गया है, जिससे हाई-नेट-वर्थ और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक ग्राहकों का नया सेगमेंट बाजार से जुड़ा है।
प्रीमियम सेगमेंट (रबड़ी घेवर): साइज में छोटे और कम मीठे ‘क्रंची रबड़ी घेवर’ को एक प्रीमियम मिठाई के तौर पर पेश किया जा रहा है, जिसकी पैकेजिंग और सोशल मीडिया ब्रांडिंग के कारण मार्जिन (Profit Margin) काफी बेहतर मिल रहा है।
जनता आवाज़ का विश्लेषण: पूंडरी का फिरनी बाजार यह साबित करता है कि अगर पारंपरिक भारतीय उत्पादों को सही समय पर सोशल मीडिया और आधुनिक सप्लाई चेन का साथ मिले, तो लोकल क्लस्टर्स (Local Clusters) बहुत कम निवेश में करोड़ों रुपये का ग्रामीण रोजगार और टर्नओवर जेनरेट कर सकते हैं।


